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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। भारतीय संस्$कति उत्सव प्रधान संस्कृति है, उत्सव मानव जीवन में नई उमंग नए रंग और नया जोश भरते हैञ उत्सव सामाजिक माहौल को खुशहाल बनाते हैं। ये हमारे संास्कृतिक मूल्यों को समृद्ध करके मानव को एकात्मकता के साथ जीवन को रसमय बनाने का सुअसर प्रदान करते है। ये प्रवचन मुनिविनय कुमार अलोक ने सेक्टर 24 में अणुव्रत धाम में दिए।
महाराज ने कहा कि भगवान ऋषभ देव सभी धर्म दर्शनों में प्रकारांतर से पूजित है। श्रीमद् भागवत वेद पुराण कुराण और बाइबल में ऋषभ देव की अर्चना की गई है। भगवान देव कर्मयुग के प्रणेता और धर्मा के उपदेष्टा थे। युग के आदि में जन्म ग्रहण करके भगवान ऋषभ देव ने जन्म लेकर मानव जाति पर महान उपकार किया है। अक्षय तृतीश सुपात्र दान का आदि पर्व है। इस मौके र जो संदेश मुनि ने दिया वह हमारा सच्चा मार्गदर्शक है। यह हम सबका फर्ज बनता है कि जहां तक संभव हो सके हम सब महाराज के संदेश को अपने जीवन में उतारें।
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