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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. शहर के सरकारी स्कूलों में पंजाब एवं हरियाणा के प्रिंसिपल्स प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने और यूटी काडर के प्रिंसिपल्स को तैनात करने को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को कैट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने कहा कि याचिका दायर करने वाले टीचर्स का तर्क है कि चंडीगढ़ में रूल्स के तहत पंजाब एवं हरियाणा के टीचर्स प्रतिनियुक्ति पर तैनात नहीं हो सकते। अगर उनकी यह दलील ठीक है तो वहां से प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर यहां कोई नहीं आएगा। अगर रूल्स में प्रोविजन है तो डेपुटेशन पर प्रिंसिपल्स की तैनाती होगी। इस पर सरकार वकील ने अदालत से जवाब देने के लिए समय की मांग की है। अदालत ने मामले में आगामी सुनवाई के लिए 2 अगस्त की तारीख तय की है।
लिहाजा केस में आगामी सुनवाई तक डेपुटेशन पर पंजाब एवं हरियाणा से प्रिंसिपल्स की तैनाती पर रोक लगी जारी रहेगी। इससे पहले गत 30 अप्रैल को जीएमएसएसएस-10 के टीचर चितरंजन सिंह की ओर से यूटी के स्कूलों में पंजाब एवं हरियाणा काडर के प्रिंसिपलों की नियुक्ति पर रोक लगाने संबंधी याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कैट ने केस में आगामी सुनवाई तक पंजाब एवं हरियाणा से डेपुटेशन पर बतौर प्रिंसिपल नियुक्ति पर 14 मई तक रोक लगा दी थी।
गौरतलब है कि शहर के 107 सरकारी स्कूलों में 11 प्रिंसिपल डेपुटेशन पर पंजाब एवं हरियाणा से आए हैं। इनमें से पांच प्रिंसिपल पिछले दो साल से चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। जबकि अन्य 6 प्रिंसिपल करीब 10 साल से यहां पर टिके हुए हैं। नियमानुसार डेपुटेशन पर बाहर से आने वाले प्रिंसिपल तीन साल तक ही रह सकते हैं। उनका काम संतोषजनक पाए जाने पर उन्हें दो साल की एक्सटेंशन दी जा सकती है। यानि की कोई भी प्रिंसिपल डेपुटेशन पर पांच साल से ज्यादा समय तक चंडीगढ़ के किसी भी सरकारी स्कूल में नहीं रह सकता। चितरंजन सिंह की ओर से दायर की गई याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2009 में पंजाब सर्विस रूल्स में परिवर्तन किया गया और नए रूल्स के मुताबिक डेपुटेशन का कोई कोटा तय नहीं है। नए रूल्स के तहत 55 फीसदी प्रमोशन लेक्चरर से प्रिंसिपल बनने पर, 30 फीसदी हेड मास्टर से प्रिंसिपल जबकि 15 फीसदी वोकेशनल टीचर से प्रिंसिपल पद पर प्रमोट किया जा सकता है। इसके उलट यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 25 फीसदी प्रिंसिपल की सीटें डेपुटेशन पर पंजाब एवं हरियाणा से आए प्रिंसिपलों को दे दी। यही नहीं डिपार्टमेंट ने कुछ समय पहले एक वोकेशनल टीचर को भी प्रिंसिपल बना दिया था। चितरंजन के अनुसार अगर डिपार्टमेंट पंजाब के नए सर्विस रूल्स को अपना रहा है तो फिर डेपुटेशन पर प्रिंसिपल क्यों लिए जा रहे हैं।
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