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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। सिर्फ पांच साल की उम्र में गुरगद्दी संभालने वाले सिखों के आठवें गुरू श्री गुरु हरकिशन जी ने पूरा जीवन बीमारों की सेवा में लगाया। दिल्ली में चेचक पीडि़तों की सेवा करते हुए ही वह चेचक के शिकार हो गए। अंतिम समय में उन्होंने नौवें नानक की घोषणा करनी थी। बाबा (दादा) बकाला कर कर बाल पीर ने अपने जीवन का त्याग कर दिया। उनके इन लफ्जों की वजह से बकाला में सोढ़ी खानदान से जुड़े लोगों ने खुद को गुरू घोषित कर दिया। जानना चाहेंगे आप कि जब यह विवाद खड़ा हुआ तो क्या हुआ? कैसे नोवें गुरू को किसने ढूंढा?
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