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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की पंजाब यूनिवर्सिटी इकाई ने सोमवार को दिल्ली जाकर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शशी थरूर से मुलाकात की और उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी में पंजाबी बंद करने के खिलाफ ज्ञापन दिया। डीयू और उससे एफिलिएटेड सभी कॉलेजिस में इस बार से रीजनल लैंग्वेज बंद की जा रही हैं।
एनएसयूआई के पार्टी प्रेसिडेंट मनोज लुबाणा ने बताया कि एमएचआरडी स्टेट मिनिस्टर ने उन्हें आश्वासन दिया है कि दो-तीन दिन के भीतर ही यह मसला सुलझाया जाएगा। दिल्ली में पंजाबियों की आबादी 40 फीसदी है। इसलिए पंजाबी को बंद करने से उन लोगों को नुकसान होगा जो पंजाब से बाहर रहते हुए भी अपने बच्चों को अपनी भाषा पढ़ाना चाहते हैं। ऑनर्स कोर्स में डीयू ने पंजाबी के साथ ही सभी रीजनल भाषाएं पढ़ाना बंद कर दिया है। चेयरमैन हरदीप सिंह लाली ने कहा कि वह इस संबंध में डीयू के वीसी से भी मिल चुके हैं। शुक्रवार को ही एनएसयूआई ने पंजाबी डिपार्टमेंट के साथ मिल कर इस संबंध में कैंडल मार्च निकाला था।
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