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डाउनलोड करेंचंडीगढ़। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ड्रीम प्रोजेकट आदर्श स्कूलों में घपले बाजी के मामले सामने आए हैं। कांग्रेस ने इस पर खुलासा करते हुए पूरे मामले पर सरकार से व्हाइट पेपर जारी करने के साथ साथ इसकी जांच कैग से करवाने की मांग की है। इसके अलावा घपलेबाजी में लिप्त लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने को कहा है।
आरटीआई से जानकारी लेकर पार्टी के प्रवकता सुखपाल खैहरा ने आरोप लगाया कि फिरोजपुर के हरदासा और मोगा के मनावां स्कूलों में भारी घपलेबाजी सामने आई है।
इसमें स्कूल प्रबंधन सरकार से पैसा लेने के लिए न केवल स्टाफ की गिनती ज्यदा बता रहे हैं बल्कि उन्हें भारी सेलेरी दी जा रही बताई जा रही है। यही नहीं, इन स्कूलों को चला रही सोसायटियों ने कुछ स्कूल बंद कर दिए हैं जिससे तीस हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है।
इन बच्चों के अभिभावकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। चमेल ङ्क्षसह नामक एक अभिभावक की याचिका पर हाईकोर्ट ने दो महीने में सभी स्कूलों की रिपोर्ट डायरेेकटर जनरल स्कूल से मांगी है। हरदासा के आदर्श स्कूल मे बाबा ईश्र ङ्क्षसह एजुकेशन सोसायटी द्वारा चलाए जा रहे स्कूल एक एमडी को रखकर उसे पचास हजार सेलेरी दी रही है जबकि को-आर्डिनेटर को दस हजार दिए जा रहे हैं। सोसायटी के मालिक ने अपने दो पुत्रों के नाम पर भी पैसे लिए हैं जबकि एक बेटा यूके में पढ़ रहा है। खैहरा ने कहा, ये मामला केवल एक दो स्कूलों का नहीं है बल्कि दो चार स्कूलों को छोड़कर सभी स्कूलों में है इसलिए इस घोटाले की पूरी जांच कैग से करवाई जानी चाहिए।
कया योजना थी आदर्श स्कूलों की
पीपीपी मॉडल में राज्य के हर बलॉक में आादर्श स्कूल खोले जाने थे जिसके लिए पंचायतों को जमीन थी। बिल्डिंग का खर्च आधा आधा दिया जाना था। इसके अलावा रनिंग खर्च ७० फीसदी पंजाब सरकार ने और ३० फीसदी प्राइवेट कंपनी ने देना था। विद्यार्थियों से किसी प्रकार का कोई खर्च नहीं लिया जाना था। लेकिन अपने तीस फीसदी भी सरकार और विद्यार्थियो से लेने के लिए प्राइवेट कंपनियों ने गैर वाजिब खर्चे दिखाए और विद्यार्थियों से दाखिला फीस और ट्रांसपोर्ट के पैसे लिए गए।
कैसे दिखाए खर्चे
जून महीने में डीजल खर्च साढ़े तीन लाख दियाा जबकि पूरा महीना स्कूल बंद थे।
१८०० स्कूल विद्यार्थियों के लिए सौ से ज्यादा सहायक रखे गए। अध्यापकों को दिए जाने वाले वेतन में से पांच हजार रुपए लैपटॉप के फेकल्टी डेवलपमेंट के नाम पर काटे जा रहे हैं।
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