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अकबर ने भी मानी थी हार, अब तक धरती के गर्भ से निकल रही हैं नौं ज्वालाएं

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। ज्वालामुखी देवी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कांगड़ा से करीब दो घण्टे की दूरी पर है। यहां पहाड़ी रास्ता है, मतलब गाड़ियां ना तो रूकती हैं और ना ही तेज चाल से दौड़ पाती हैं। ज्वालामुखी एक शक्तिपीठ है जहां देवी सती की जीभ गिरी थी। सभी शक्तिपीठों में यह शक्तिपीठ अनोखा इसलिए माना जाता है कि यहां ना तो किसी मूर्ति की पूजा होती है ना ही किसी पिंडी की, बल्कि यहां पूजा होती है धरती के अन्दर से निकलती ज्वाला की।
इसके बारे में एक और कथा जुडी है। अकबर ने जब इसके बारे में सुना तो उसने इस ज्वाला को किसी भी तरह बंद करने का आदेश दिया। लेकिन अनगिनत कोशिश करने पर भी वो ऐसा ना कर सका। अंत में इसकी चमत्कारी शक्ति को जानकार उसने यहां पर मत्था टेका और सवा मन (पचास किलो) सोने का छत्र चढ़ाया। मंदिर के पास ही गोरख डिब्बी है। कहते हैं कि यहां गुरु गोरखनाथ जी पधारे थे और अपने चमत्कार दिखाए थे। असल में इस जगह पर एक कुण्ड है। इसमें भरा हुआ जल लगातार उबलता रहता है और ठंडा है।
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