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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. बच्चे जब थिएटर करते हैं तो भले ही उसमें प्रोफेशनलिज्म नजर न आए। पर अपनी मासूमियत में वह मैसेज दे ही जाते हैं। प्लाजा में चल रहे चिल्ड्रंस थिएटर फेस्टिवल में वीरवार को ऑर्गनाइज नाटकों के माध्यम से स्कूल स्टूडेंट्स ने यह प्रूव कर ही दिया। उन्होंने न सिर्फ अपनी उम्र बल्कि अपने से बड़े लोगों को भी मस्ती-मस्ती में काम की बातें समझा दीं। जितने उत्साहित होकर चंडीगढ़ के गवर्नमेंट स्कूलों के इन बच्चों ने नाटक खेले, उतना ही दर्शकों ने इनकी परफॉर्मेंस को सराहा भी।
परिवार में करें रिस्पांसिबिलिटी शेयर
सबसे पहले गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-21 के स्टूडेंट्स ने फेसिलिटेटर मिंका की गाइडेंस में तैयार नाटकों का मंचन किया। नाटक 'हेल्दी मॉम हेल्दी फैमिलीÓ के माध्यम ने समझाया गया कि हर फैमिली में मां का योगदान सबसे अहम होता है और उस पर उतना ही प्रेशर भी होता है। दादी को अपनी बहू से समय पर चाय चाहिए, पति को अपनी शर्ट समय पर प्रेस्ड चाहिए तो बच्चों को अपना टिफिन तैयार चाहिए। ऐसे में सबकी केयर करते-करते वह खुद की केयर करना भूल जाती है। समय पर खाना नहीं खा पाती और अपनी सेहत को नजरअंदाज करती जाती है। जबकि सच तो यह है कि अगर मां की सेहत अच्छी रहेगी तभी वह फैमिली की केयर कर सकती है। इसलिए परिवार के हर मेंबर को रिस्पांसिबिलिटी शेयर करनी चाहिए।
डायल करें महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर
दूसरे नाटक 'महाभारतÓ में गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-21 के स्टूडेंट्स ने कटाक्ष किया पुरुषार्थ पर। नाटक की शुरुआत हुई महाभारत के उस दृश्य से जब द्रोपदी का चीरहरण हो रहा था और सभी महान योद्धा इस तमाशे को देख रहे थे। दर्शकों से पूछा गया कि क्या यही पुरुषार्थ है? इसके बाद नाटक पहुंचा आज के आधुनिक युग में। यहां ईव टीजिंग का दृश्य दिखाया गया। दिखाया गया कि एक सड़क छाप रोमियो गली से जा रही एक लड़की को गाना, 'रैंबो किसी से नहीं डरते, रैंबो की शर्ट देखो रैंबो की पेंट देखोÓ गाते हुए छेड़ता है। दर्शकों को संदेश दिया गया कि भले ही युग बदल गए हैं। पर महिलाओं के प्रति पुरु षों की सोच आज भी वही है। ऐसे रैंबो हर गली में मिलते हैं पर इनसे डरना नहीं चाहिए। और जब कोई हद से ज्यादा तंग करे तो महिलाओं को हेल्पलाइन नंबर 1091 पर कॉल करना चाहिए।
प्रेजेंस ऑफ माइंड होगा तो जिंदगी रहेगी आसान
गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-20 के स्टूडेंट्स ने पेश किया नाटक 'अकबरी लोटा।Óइसे फेसिलिटेटर चक्रेश कुमार की गाइडेंस में तैयार किया गया था। नाटक में संदेश दिया गया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी अगर हम प्रेजेंस ऑफ माइंड से काम लेंगे तो जिंदगी आसान रहेगी। नाटक में अंधविश्वास पर भी कटाक्ष किया गया। कहानी की शुरुआत में एक बीवी अपने पति से 250 रुपये मांगती है जो पति के पास नहीं होते। वह अपने दोस्त से पैसे मांगने के लिए जाता है और दोस्त भी उससे चंद घंटों का समय मांगता है। इस दौरान छत पर बैठे पति से पानी का लोटा गली में जा रहे राहगीर पर गिर जाता है। राहगीर गुस्से में आ जाता है। इतने में पति का दोस्त भी वहां आ जाता है। यह झगड़ा देख वह दिमाग से काम लेते हुए परिस्थिति का फायदा उठाता है और उस लोटे को अकबरी लोटा बताकर राहगीर से 500 रुपये बटोरकर अपने दोस्त को दे देता है।
पढ़ाई वो जिसमें ज्ञान की वृद्धि हो
फेसिलिटेटर विनोद कुमार की गाइडेंस में गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-16 के स्टूडेंट्स ने पेश किया नाटक 'पढ़ाई हो।Ó बच्चों ने संदेश दिया कि पढ़ाई ऐसी हो जिसमें रट्टा नहीं ज्ञान मिले। नाटक के किरदार मैथ्स, इंग्लिश, साइंस, हिंदी के रूप में पेश हुए। स्कूल गोइंग बच्चों को मैथ्स बोला, मुझे पढ़कर आप जीनियस हो जाओगे तो साइंस ने कहा मुझे पढ़कर तुम्हारा दुनिया में नाम हो जाएगा। इसी तरह इंग्लिश बोला, मुझे पढ़कर तुम सोसायटी की एलीट क्लास में गिने जाओगे, सोसायटी में तुम्हारी इज्जत होगी। इतना सुनकर सभी बच्चे रट्टा मारकर पढ़ाई करने लगे। इसी बीच एक लड़की ने आकर सभी से कहा, ये तो रट्टा है, पढ़ाई कहां है? पढ़ाई तो वह है जिसमें ज्ञान मिले और बुद्धि का विकास हो।
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