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राजा की संपत्ति के कई हकदार, दिल्ली के कारोबारी ने भी जताया दावा

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह बराड़ की 22 हजार करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी केस में शुक्रवार को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशंस जज नाजर सिंह की अदालत में दिल्ली सरदार गुरप्रीत सिंह व अन्य ने जिला अदालत में याचिका दायर कर इस केस में उन्हें भी पार्टी बनाए जाने की मांग की। हमारे साथ राजकुमारी अमृत कौर ने 14 फरवरी 1996 को एक असाइनमेंट डीड और एक पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की थी। जिसकी शर्तों के मुताबिक अगर कोर्ट का फैसला आता है तो जो भी प्रॉपर्टी मिलेगी। उस प्रॉपर्टी के हिस्से में से 80 फीसदी दिल्ली के कारोबारी गुरप्रीत सिंह व अन्य को मिलेगा। 20 फीसदी की मालिक राजकुमारी अमृत कौर होंगी। दिल्ली की पार्टी की याचिका पर अदालत ने राज कुमारी अमृत कौर को नोटिस जारी कर 15 फरवरी को अपना पक्ष रखने को कहा है। वहीं इस तारीख पर इस केस में विभिन्न पार्टियों को कोर्ट फीस अदा किए जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा।

गुरप्रीत सिंह के वकील मुताबिक डीड के समय उनके क्लाइंट ने राजकुमार अमृत कौर को बतौर असाइनमेंट डीड की राशि 65 लाख रुपए उस समय ही दे दिए थे। उन्होंने यह भी कहा है कि राजा की संपत्ति को लेकर मेंटीनेंस खर्च आदि भी दिए। अर्जी के मुताबिक जब निचली अदालत ने राजकुमारी अमृत कौर के हक में फैसला दिया तो उन्होंने डीड के मुताबिक उनका हिस्सा नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली हाईकोर्ट में राजकुमारी अमृत कौर के खिलाफ दावा कर दिया। दावे में महरावल खेवाजी ट्रस्ट और महारानी दिपेंद्र कौर को पार्टी बनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2013 में अपने फैसले में कहा कि राजकुमारी अमृत कौर किसी और के साथ असाइनमेंट नहीं करेंगी। उन्होंने अदालत से कहा कि राजा की संपत्ति पर उनका हक है। इसलिए उन्हें भी इस केस में पार्टी बनाया जाए।

22 जुलाई को सीजेएम की अदालत ने राजा की 22 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी का मालिकाना हक उनकी बड़ी बेटी राजकुमारी अमृत कौर और दूसरी बेटी महारानी दीपिंदर कौर (अब कोलकाता के राजघराने की महारानी) को दिया था। निचली अदालत ने राजा की 1982 की वसीयत को अवैध ठहराया था। इस वसीयत में राजा ने महरावल खेवाजी ट्रस्ट बनाकर प्रॉपर्टी इसके नाम कर दी थी। इस ट्रस्ट की चेयरपर्सन महारानी दीपिंदर कौर हैं। ट्रस्ट ने इस फैसले को चुनौती दी थी। ट्रस्ट ने कहा था कि अदालत ने 1952 की वसीयत पर गौर नहीं किया, जिसमें राजा ने बड़ी बेटी अमृत कौर को प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। इसके बाद राजा के छोटे भाई के बेटे भरत इंदर सिंह ने भी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अदालत में अपील दायर कर कहा था कि राजा के घर के सबसे बड़े मेल मेंबर के नाते वे प्रॉपर्टी के हकदार हैं।