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गमाडा भवन की नीलामी बचाने के लिए 5 अप्रैल तक का समय

8 वर्ष पहले
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मोहाली. ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट (गमाडा) द्वारा नॉलेज सिटी की जमीन एक्वायर करने के बाद उन किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिया, जिन्होंने कोर्ट में केस डाले थे। इसके के चलते मोहाली कोर्ट की ओर से गमाडा की बिल्डिंग पहले कुर्की करने और फिर नीलाम करने के आदेश दिए थे। नीलामी से अपनी बिल्डिंग को बचाने के लिए गमाडा ने कई किश्तों में कोर्ट में करोड़ों के हिसाब से पैसे जमा करवाए थे। विज्ञत कई पेशियों से गमाडा ने कोर्ट में पैसे नहीं जमा करवाए थे। इसी के चलते शनिवार को मोहाली कोर्ट में एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जसविंदर सीमार की कोर्ट में गमाडा के वकील प्रेम कुमार सैनी पेश हुए। वहीं, दूसरी ओर किसानों की ओर से एडवोकेट शेर सिंह राठौर पेश हुए। सुनवाई के दौरान गमाडा के वकील प्रेम कुमार सैनी ने कोर्ट से पैसे जमा करवाने को लेकर समय मांगा। कोर्ट ने मामले की कार्रवाई करते हुए गमाडा को पेमेंट जमा करवाने के लिए 5 अप्रैल तक का समय दिया।

करीब 200 करोड़ रुपये है बकाया
एडवोकेट शेर सिंह राठौर ने बताया कि नॉलेज सिटी की जमीन को लेकर गमाडा द्वारा कई किश्तों में करोड़ों रुपये जमा हो चुके है। उन्होंने बताया कि गमाडा को अब तक नॉलेज सिटी की जमीन का करीब 200 करोड़ रुपये किसानों का कोर्ट में जमा करवाना है।

यह है मामला
वर्ष 2004 में 417 एकड़ जमीन की थी एक्वायर
गमाडा ने वर्ष 2004 में नॉलेज सिटी बनाने के लिए सेक्टर-81 की 417 एकड़ जमीन एक्वायर करने का नोटिस जारी किया था, जिसे 2006 में 40 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से एक्वायर किया गया। किसानों का केस लड़ रहे एडवोकेट शेर सिंह राठौर ने बताया कि इस 40 लाख प्रति एकड़ के अवार्ड को 90 फीसदी किसानों ने कोर्ट में चैलेंज किया था। लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट ने कुंभड़ा व मौली बैदवान की जमीन का रेट 71.40 लाख तथा रायपुक खुर्द व चीला की जमीन का 53.40 लाख रूपये रेट निर्धारित किया था। इसी के आधार पर किसानों को ब्याज सहित पैसे देने थे। करीब 105 केसों का 400 करोड़ रूपया गमाडा की ओर खड़ा है। इस केस में ही गमाडा की बिल्डिंग नीलाम कर पैसे देने के आदेश कोर्ट ने सुनाए थे, जिसे बचाने को लेकर गमाडा पैसे जमा करवा रहा है।