चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश सुंदर पहाड़ों से घिरा एक खूबसूरत प्रदेश है। हिमाचल देवभूमि के नाम से भी मशहूर है। हिमाचल प्रदेश में अनेक देवी देवताओं के मंदिर है। उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से 180 किलोमीटर दूर सराहन में व्यास नदी के तट पर स्थित भीमाकाली मंदिर, जो 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह देवी तत्कालीन बुशहर राजवंश की कुलदेवी है, जिसका पुराणों में उल्लेख मिलता है। यह मंदिर बेहद सुंदर है जहां कई देवताओं की मूर्ति को प्रदर्शित किया गया है।
कहा जाता है कि आदि शक्ति तो एक ही है लेकिन अनेक प्रयोजनों से यह भिन्न-भिन्न रूपों और नामों में प्रकट होती है जिसका एक रूप भीमाकाली है। सराहन में एक ही स्थान पर भीमाकाली के दो मंदिर हैं। प्राचीन मंदिर किसी कारणवश टेढा हो गया है। इसी के साथ एक नया मंदिर पुराने मंदिर की शैली में बनाया गया है। यहां 1962 में देवी मूर्ति की स्थापना हुई। इस मंदिर परिसर में तीन प्रांगण आरोही क्रम से बने हैं जहां देवी शक्ति के अलग-अलग रूपों को मूर्ति के रूप में स्थापित किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भीमाकाली की प्राचीन मूर्ति पुराने मंदिर में ही है और हर कोई उसके दर्शन नहीं कर सकता।
आम प्रचलित हिल स्टेशनों के मुकाबले यहां पर काफी शांति और नैसर्गिक सुंदरता है। सराहन शहर को रामपुर बुशहर के राजाओं की प्राचीन राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर कई मंजिला है और सबसे उपर माता का विग्रह स्थापित है। यहां मंदिर में प्रवेश से पहले सिर पर टोपी अवश्य पहननी होती है। मंदिर में अपने साथ कुछ भी सामान नहीं ले जा सकते हैं।
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