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डाउनलोड करेंहोशियारपुर। इसे जुनून ही कहेंगे कि राजस्थान के जिला भीलवाड़ा के छोटे से गांव मांडल से निकले व इस समय गुरु रविदास आयुर्वेद युनिविर्सिटी होशियारपुर के वाईस चांसलर पद पर तैनात डा. ओम प्रकाश उपाध्याय आज देश की चुनिंदा शख्सियतों में शामिल हो गए हैं। देश में अलग- अलग क्षेत्रों से चुनिंदा 101 शख्सियतों में शामिल डा. ओम प्रकाश उपाध्याय को मैडीसिन (आयुर्वेद) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए वर्ष 2014 में पद्मश्री अवार्ड सम्मान के लिए चुना गया है। घोषणा के बाद फोन पर दैनिक भास्कर से खास बातचीत करते हुए डा. ओपी उपाध्याय ने बताया कि उनके लिए यह पल जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। गौरव के इस अनमोल क्षण पर पर डा.ओपी उपाध्याय की पत्नी भंवरी देवी और जयपुर मेडिकल कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बेटे डा. आलोक उपाध्याय व अपोलो ग्रुप के कंपनी में जीएम पद पर तैनात छोटे बेटे अभिषेक उपाध्याय ने भी खुशी जताई।
वाइस चासलर डा.ओपी उपाध्याय का सफर
राजस्थना के जिला भीलवाड़ा के छोटे से गांव मांडल के रहने वाले डा. ओम प्रकाश उपाध्याय 1966 में उदयपुर से मैट्रिक परीक्षा पास की। इसके उफरांत राजस्थान युनिवर्सिटी से साल 1970 में पहले शास्त्री व बाद में आयुर्वेचार्य की डिग्री हासिल की। इसके बाद साल 1973 व 1974 में उन्होंने उदयपुर युनिवर्सिटी से एमए करने के उफरांत 1986 में राजस्थान युनिवर्सिटी से पहले एमडी व 1988 में पीएचडी की। डा. ओपी उपाध्याय ने आयुर्वेद में एम.डी. व पी.एच.डी. करने के अतिरिक्त संस्कृत भाषा में एम.ए., व्याकरणाचार्य और दर्शनाचार्य की उच्च उपाधियां प्राप्त की हैं।
चार चुलाई 2011 से डा. उपाध्याय होशियारपुर में वीसी पद पर हुए थे तैनात डा. ओम प्रकाश उपाध्याय 4 जुलाई 2011 को आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभालने से पहले वे नेशनमल इंस्टीच्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर में बतौर प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष नियुक्त थे। प्रो. उपाध्याय विख्यात नाड़ी वैद्य हैं और आज भी वे आयुर्वेद विश्वविद्यालय, होशियारपुर में अपने कक्ष में रोगियों की नाड़ी देखकर रोगों को निदान करते हैं और आयुर्वेद चिकित्सा संबंधी परामर्श देते है। उन्होंने 35 वर्ष तक आयुर्वेद चिकित्सा व शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है तथा अंगे्रकाी, हिन्दी व संस्कृत भाषाओं में आयुर्वेद चिकित्सा पर कई पुस्तकें लिखी हैं। उन्हें संस्कृत व आयुर्वेद के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय स्तर के पुरुस्कार मिल चुके हैं। वे संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान हैं व संस्कृत के विकास के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं।
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