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सात महीने बाद भी डीएमसी का पता नहीं

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी ने मई-जून 2013 में पोस्ट ग्रेजुएशन के जो एग्जाम लिए थे, उनके डिटेल माक्र्स कार्ड (डीएमसी) अभी तक जारी नहीं किए गए। इस कारण स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। डीएमसी नहीं मिलने के कारण किसी का प्रमोशन रूका है तो कोई अपने ऑर्गनाइजेशन में अपनी डिग्री का प्रूफ नहीं दे पा रहा है। पीयू की इसी लापरवाही का खामियाजा मोहाली जिला अदालत में कार्यरत एक युवती अपनी को भुगतना पड़ रहा है। एमए पॉलिटिकल साइंस का डिटेल माक्र्स कार्ड लेने के लिए परेशान हैं क्योंकि उसे अपना बायोडाटा अपडेट कराना है जो उसकी प्रमोशन में लाभदायक होगा। जून 2013 में पेपर दिए थे लेकिन अभी तक रिजल्ट नहीं आया। निजी संस्थान में कार्यरत जतिंदर की भी यही परेशानी यह है कि वह अपने डिपार्टमेंट को बायोडाटा अपडेट करवा चुकी हैं लेकिन एमए पूरा होने का प्रूफ डीएमसी या डिग्री अभी उसके पास नहीं है। कंपनी मांग रही है और पीयू से हर बार जवाब मिलती है कि कुछ दिन डीएमसी आपके घर आ जाएगी।

पीयू ने एग्जामिनेशन सिस्टम को ऑनलाइन करने संबंधित तमाम सुधार के दावे किए हों लेकिन अपने पुराने सिस्टम को मेंटेन करने में उन्हें कामयाबी नहीं मिल पा रही। हाल ही में ग्रिएंवेस रिड्रेसल का काम ऑन लाइन कर दिया गया। लेकिन उससे पहले की शिकायतों का जवाब पीयू का एगजामिनेशन डिपार्टमेंट हर बार लारे के रूप में देता है। उस पर स्टूडेंट्स के लिए वेबसाइट पर ही लिख दिया गया है कि इसके बिना कोई शिकायत एंटरटेन नहीं होगी। ऐसे ही कई स्टूडेंट अब भी कैंपस में दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि पीयू ने ऐसा कोई सिस्टम शुरु किया है, ये उन्हें नहीं पता था। अब आए तो जवाब मिल रहा है कि डीएमसी पहुंच जाएगी। क्या सात महीने बाद भी डीएमसी देना संभव नहीं है। इस संबंध में जब कंट्रोलर एगजामिनेशन प्रो परविंदर ङ्क्षसह संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके पीए ने मीटिंग में होने का दावा किया।