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डार्क जोन के मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भेजा पंजाब सरकार को नोटिस

7 वर्ष पहले
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होशियारपुर। होशियारपुर के छोटे से गांव दौलतपुर गिल्लां के रहने वाले व इस समय मुंबई में अपना बिजनेस संभाल रहे पीके राणा की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली की तरफ से पंजाब सरकार को गिरते भू जलस्तर पर के मुद्दे पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी मुकर्रर की है। आज मंगलवार को दैनिक भास्कर कार्यालय होशियारपुर में ट्रिब्यूनल की तरफ से जारी नोटिस दिखाते हुए एनजीओ संस्था सफल भारत गुरु संस्था परंपरा के चेयरमैन पीके राणा ने बताया कि पंजाब में गिरते भू जलस्तर की असली वजह यहां पर बेइंतहा पानी के दोहन के साथ साथ अत्यधिक मात्रा में सफेदे के वृक्ष लगाना असली कारण है।

यही नहीं स्वयं सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने भी साल 2012 में पंजाब सरकार को चेताया था कि पंजाब में फ्री बिजली मिलने की वजह से किसान अत्यधिक मात्रा में सफेदे के वृक्ष लगा रहे हैं जिस वजह से पंजाब के 137 जोन में से 100 से अधिक जोन डार्क जोन में आ गया है जबकि 27 जोन ऐसे भी है जहां युद्घस्तर पर पानी का दोहन हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल दिल्ली की तरफ से याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी(कृषि), सचिव कृषि विभाग, वाटर रिसोर्स विभाग के चीफ इंजीनियर, पावरकाम के सेक्रेटरी के साथ साथ सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथारिटी को नोटिस जारी किया है।

गांव में मिली अनुभव से किया है याचिका दायर
होशियारपुर के याचिकाकर्ता पीके राणा ने बताया कि कुछ समय पहले जब वह अपने पैतृक गांव दौलतपुर गिल्ला गया तो उस समय हैरान रह गया कि नलके से पानी नहीं निकल रहा था। जब मैकेनिक को बुलाया तो बताया कि आपको डीप बोर करवाना पड़ेगा क्योंकि पानी का लेवल सौ फुट से भी नीचे चला गया है। जब इस संबंध में जानकारियां जुटाई तो चौकाने वाले नतीजे देख हैरान रह गया। हमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की वह शब्द याद आ गया कि अगला विश्वयुद्घ जब भी होगा वह पानी के लिए ही होगा। हमने उसी समय ठान लिया कि वह गिरते भू जलस्तर के लिए संघर्ष करेंगे।

पंजाब सरकार कर्नाटक की तरह सफेदे वृक्ष लगाने पर लगाए रोक
पीके राणा ने बताया कि एक सफेदे का वृक्ष एक दिन में 80 गैलन पानी खर्च करता है। यही नहीं जमीन के नीचे सौ फुट नीचे तक के पानी को यह वृक्ष बड़े ही आसानी से सोख लेता है। पंजाब में फ्री बिजली मिलने की वजह से किसान सफेदे के वृक्ष ज्यादा लगा जमकर पानी का दोहन कर रहे हैं। पीके राणा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि स्वयं राज्य के सिचाई मंत्री जेएस सेखों कहते हैं कि राज्य के 85 फीसदी हिस्सों में पानी जमीन के नीचे से बड़े ही तेजी से गायब हो रहे हैं। यही नहीं सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथारिटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पांच दरियाओं से घिरे पंजाब में 38 साल बाद पानी के लिए हाहाकार मच सकती है। उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य में पानी का अत्यधिक दोहन हो रही है वहीं सरकार दूसरी तरफ से थोक के भाव में नए नए डीप बोर वाले ट्यूबवेल लगवा रही है जिसपर रोक लगनी चाहिए।