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गरीब बच्चों को पढ़ाया, लेकिन फीस सरकार ने नहीं दी

9 वर्ष पहले
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भोपाल। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत भोपाल सहित प्रदेश के कई प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें गरीब बच्चों को पढ़ाने की एवज में फीस अब तक नहीं मिली है। पिछले सत्र के दौरान इन स्कूलों ने अपने यहां 25 फीसदी बच्चों को आरटीई के तहत एडमिशन दिया था। उधर, संबंधित अधिकारी इस मामले में कुछ तकनीकी गड़बड़ी होने की बात कह रहे हैं।



स्कूल संचालक भले ही इस मामले में खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, परंतु जिला शिक्षा केंद्र और राज्य शिक्षा केंद्र में उनके मामले अटके हुए हैं। हालांकि, इसमें कुछ स्कूलों की भी गलती से इंकार नहीं किया जा सकता, जिन्होंने एजुकेशन पोर्टल पर तो फीस का क्लेम कर दिया पर उसकी कॉपी जिला शिक्षा केंद्र को नहीं भेजी।



यह स्कूल हैं भोपाल के: भोपाल का नेशनल इंग्लिश मिडिल स्कूल, रेड एंजिल मिडिल स्कूल और केएम कान्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी आरटीई की फीस का भुगतान नहीं हो पा रहा है। पूर्व में इस लिस्ट में शहर के नामी सीबीएसई स्कूल भी थे परंतु उनके प्रकरण राज्य शिक्षा केंद्र से स्वीकृत हो चुके हैं।



तकनीकी मामला है: जिन स्कूलों की फीस अभी तक नहीं चुकाई गई है, उन्होंने एजुकेशन पोर्टल पर तो ऑनलाइन एंट्री कर दी है पर उसकी कॉपी जिला शिक्षा केंद्र को नहीं दी है। जिला परियोजना समन्वयक आरके पांडेय का कहना है कि जल्द ऐसे स्कूलों के मामले सुलझ जाएंगे और उनकी फीस का भुगतान कर दिया जाएगा।