पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • और अधूरा रह गया भोज मंदिर का निमार्ण..<श्च>< श्च>

और अधूरा रह गया भोज मंदिर का निमार्ण..<श्च></श्च>

9 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
यहां लगेगा महाशिवरात्रि में भव्य मेला, जुटेंगे दुनियाभर के श्रध्दालु
इसलिए अधूरा रह गया मंदिर: भोजपुर के आस-पास रहने वाले विद्वानों की मानें तो मंदिर का निर्माण राजा भोज ने अपने पिता की याद में करवाया था, जिसे वे एक ही रात में पूरा करवाना चाहते थे। सैकड़ों लोगों ने इस मंदिर को बनाने में योगदान दिया इसके बावजूद मंदिर पूरा न हो सका। इसका एक कारण यह भी था कि मंदिर में लगने वाले पत्थर बहुत ही भारी थे। समय एवं लोगों के अनुसार इस मंदिर के पूरे न होने की कहानी भी अलग-अलग है।
मान्यता है कि उस वक्त में लोग घड़ी देखकर नहीं बल्कि मुर्गे की बांग सुनकर जागा करते थे। जब मंदिर को एक रात में बनाने की बात हुई, उस वक्त कुछ ऐसा हुआ कि मुर्गे पर अचानक कोई जानवर कूद गया और मुर्गे ने अपने समय से पहले बांग दे दी। बांग को सुनकर कारिगरों ने अपना काम रोक दिया और तब से लेकर आज तक दुनिया का ये अनोखा शिवलिंग अधूरा ही है।
एक कारण यह भी मान्य है: यह पूरा इलाका भक्तामर स्त्रोत के रचनाकार मुनि मानतुंगाचार्य से जुड़ा हुआ है। इनकी समाधि भी यहां बनी है। यहां का मनोहारी दृश्य आत्मिक शां‍ति प्रदान करता है। राजा भोज ने वास्तुकला के लिये वास्तुविदों के प्रशिक्षण की पाठशाला चलाई थी। लेकिन राजा की आकस्मिक मृत्यु के कारण शिव मन्दिर अधूरा ही रहा। वैसे तो भोजपुर का शिव मन्दिर वीरान इलाके में खड़ा है लेकिन फिर भी श्रद्धालुओं की यहां कोई कमी नहीं है। शिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ा मेला लगता है।

इस प्राचीन नगर को उत्तर भारत का सोमनाथ कहा जाता है। यह स्थान भगवान शिव के शानदार मंदिर और साईक्लोपियन बांध के लिए जाना जाता है। यहां के भोजेश्वर मंदिर की सुंदर सजावट की गई है। मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है जिसके गर्भगृह में लगभग साढ़े तीन मीटर लंबा शिवलिंग स्थापित है।