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विदिशा रोड स्थित मालीखेड़ी में अवैध रूप से काटे जा रहे प्लाट

8 वर्ष पहले
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भोपाल। विदिशा रोड स्थित मालीखेड़ी में अवैध रूप से प्लाट काट रहे हैं। बिना वैधानिक अनुमति के प्लाटिंग तो की ही जा रही है, साथ ही किसान से इस जमीन की लिखा पढ़ी मात्र 100 रुपए के स्टाम्पप पर की गई। जानकारी लगने के बाद गोविंदपुरा वृत के अनुभागीय अधिकारी ने इस मामले में कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए है।

गोविंदपुरा वृत के अनुभागीय अधिकारी जमीन पर प्लाटिंग करने का काम इतनी चतुराई से किया जा रहा है कि किसी को ये पता भी न चले कि इस खेल में कौन-कौन शामिल हैं। इसके लिए 500 रुपए के स्टॉ प पर 'पॉवर ऑफ अटार्नीÓ मनोज कुशवाह और किसान मो. शमशेर पुत्र मो. रईस, श्रीमती आमनादी (आमनाबी) पत्नी करीम खां के बीच हुई।

मालीखेड़ी के खसरा क्र.-119/2-121 रकबा 1.793 हैक्टेयर (4.43 एकड़) भूमि पर अलग-अलग साइज के 202 प्लाट काटे हैं। शातिरों ने इतने ताबड़-तोड़ प्लाटों की विक्रय की 202 प्लाटों में से करीब 70 प्लाट बेच भी दिए हैं, जबकि 'प्रेम सिटीÓ के नाम से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ 28 अप्रैल, 2013 (रविवार) को ही हुआ। इन्होंने विदिशा रोड पर रासला खेड़ी में अवैध कॉलोनी भी काटी है, जिसमें कुछ प्लाट सरकारी जमीन पर भी काट दिए।



इसलिए बचते हैं डायवर्सन से: यह ग्राम मालीखेड़ी की पटवारी हल्का न.- 22 की खसरा क्र.-119/2-121 रकबा 1.793 हैक्टेयर (4.43 एकड़) भूमि पर 401 से 1152 स्क्वायर फीट साइज के कुल 202 प्लाट काट रहे हैं। 'प्रेम सिटी' के नाम से लांच किए गए इस प्रोजेक्ट के करीब 70 प्लाट बेच भी दिए। इस जमीन का नक्शा टीएंडसीपी से एप्रूव्ड्ड नहीं है। वहीं भूमि का डायवर्सन (व्यावर्तन) भी नहीं कराया गया है। वर्तमान में डायवर्सन शुल्क 5 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से लग रहा है, यह राशि कॉलोनी काटने वाले बचते हैं। इससे पहले नक्शा टीएंडसीपी से एप्रूव होता है। इसके बाद ही आगे की अनुमतियां मिलती हैं। कॉलोनाइजर द्वारा दिया गया नक्शा व जमीन के संबंध में बताई गई जानकारी मानक स्तर पर खरी नहीं होती है तो इसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।



नाम बदला, खेल जारी: अवैधानिक रूप से काटी जा रहे प्लाटों का खेल 'सफल प्रापर्टी एवं कंसल्टेंसी' के नाम से किया जा रहा है। इससे पहले 'वर्षा प्रापर्टी डीलर' के बैनर तले साईं धाम नाम से अवैध कालोनी काट चुके हैं। रासला खेड़ी में काटी गई कालोनी की जमीन का भी डायवर्सन नहीं कराया था, न ही नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) से इसका नक्शा अनुमोदित (एप्रूव्ड) था।


-ये अनुमतियां जरूरी
1. टीएंडसीपी से जमीन का नक्शा एप्रूव्ड होना चाहिए।
2. जहां जमीन है, उससे संबंधित क्षेत्र के एसडीएम (अनुविभागीय अधिकारी) द्वारा भूमि का डायवर्सन (व्यावर्तन) आदेश पास होना चाहिए।
3. नगर निगम से कालोनी विकास अनुमति होनी चाहिए।
4. संबंधित नजूल कार्यालय की नजूल एनओसी होना आवश्यक है। इसमें प्रमाणित हो कि उक्त भूमि शासकीय नहीं है तथा शासन का कोई पूर्व का राजस्व शेष नहीं है। शासन को इस भूमि पर कालोनी विकसित करने से कोई आपत्ति नहीं है।
5. विक्रय पत्र का पंजीयन एवं अनुबंध का पंजीयन कराया जाना अनिवार्य है, जोकि जोकि क्रेता के अधिकार का सुरक्षित करता है। इसे न्यायालयीन कार्रवाई में बतौर साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सकता है।
6. जो भी बिल्डर-कॉलोनाइजर कालोनी विकसित कर रहा है, उसके पास नगर निगम द्वारा जारी कॉलोनाइजर लाइसेंस उक्त भूमि के लिए होना चाहिए।



ये है नियम

मप्र भू-राजस्व संहिता तथा भूमि विकास नियम एवं नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के तहत प्रदेश में कहीं पर भी आवासीय या व्यवसायिक उपयोग के प्रयोजन हेतु कृषि भूमि का अथवा अन्य भूमि का डायवर्सन कराया जाना आवश्यक है। डायवर्सन के लिए भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों का पालन किया जाना आवश्यक है। किसी भी भूमि के डायवर्सन के पहले उक्त भूमि का खसरा एवं अक्स की प्रति के साथ नगर तथा ग्राम निवेश विभाग एवं अनुविभागीय अधिकारी को उक्त भूमि पर विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट का ले-आउट एवं भूमि के स्वामित्व संबंधित दस्तावेजों के साथ आवेदन किया जाता है। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से डायवर्सन के लिए संबंधित भूमि पर अनुमोदित अधिन्यास (ले-आउट) की प्रति एवं कॉलोनी विकास अनुमति प्रमाण-पत्र तथा भू-उपयोग प्रमाण-पत्र प्राप्त कर अनुमति अधिन्यास की शर्तों को ध्यान में रख कर डायवर्सन की शर्तें अधिरोपित कर डायवर्सन आदेश पास करता है। इस आदेश और ले-आउट के साथ कॉलोनाइजर स्थानीय नगर निगम/पंचायत को कालोनी विकास अनुमति हेतु आवेदन करता है। परीक्षण के बाद स्थानीय निकाय कालोनी विकास अनुमति जारी करेगा। इसके बाद अनुमोदित अधिन्यास के अनुसार कॉलोनाइजर भू-खंडों को विकसित कर बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। विक्रय किए जा रहे भू- खंड का विक्रय पत्र का पंजीयन उप पंजीयक कार्यालय में करा सकेगा।
-जो कॉलोनाइजर एवं बिल्डर इस प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित नहीं करता है। वह निश्चित तौर पर अवैध कालोनी का निर्माण कर रहा है तथा ऐसी कालोनियों के प्लाटों की रजिस्ट्री (पंजीयन) 1 अप्रैल 2013 के बाद से न किए जाने के आदेश शासन द्वारा जारी किया गया है।
देवेन्द्र प्रकाश मिश्रा,सूचना अधिकार कार्यकर्ता
-कार्रवाई की जाएगी
अवैध प्लाट काटे जाने की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जा रही है अवैध कालोनी काटे जाने के मामले में संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।
अमरजीत सिंह पवार, अनुविभागीय अधिकारी, गोविंदपुरा वृत्त