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डाउनलोड करेंभोपाल। बच्चों के खिलौनों में कहीं खतरनाक रसायन तो नहीं है? बिजली और पानी की बर्बादी के विषय में विद्यार्थियों से चर्चा की जाती है या नहीं। कहीं आपके स्कूल में बिना जरूरत के भी कंप्यूटर से प्रिंट आउट तो नहीं लिया जाता। इस तरह के सवाल राज्य शिक्षा केंद्र ने एक प्रश्नावली जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) को भेजी गई है।
प्रदेश में पर्यावरण शिक्षा को इसी शिक्षण सत्र से प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में लागू करने की तैयारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शिक्षकों का एक सर्वे किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण का कोर्स विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र की आयुक्त रश्मि अरुण शमी ने 15 मई तक इस सर्वे की रिपोर्ट भेजे जाने के निर्देश डाइट प्राचार्यों को दिए हैं।
पांच स्कूल: इस सर्वे की प्रश्नावली को फिलहाल हर जिले के पांच-पांच स्कूलों में पर्यावरण शिक्षण का कार्य करने वाले शिक्षकों को दिया जा रहा है। वे इसमें दिए गए सवालों के जवाब भरकर डाइट को देंगे। वहां से इसकी रिपोर्ट बनाकर राज्य शिक्षा केंद्र को भेजी जाएगी।
यह भी सवाल: स्कूल के पास पौधों और जानवरों की स्थिति क्या है? ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व की इमारतों का संरक्षण हो रहा है अथवा नहीं। इस तरह के कुछ अन्य सवाल भी इस सर्वे में शामिल किए गए हैं।
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