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भाड़ में जाए कंडोम की कमाई, मेरी हो रही है जगहंसाई!

8 वर्ष पहले
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भोपाल। सरकार की ये अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना परिवार नियोजन अब इज्जत बचाने के खातिर दाव पर लग गई है। कार्यकर्ताओं की माने तो जब वे किसी के दरवाजे पर कंडोम बेचने जाते हैं तो कई बारे उन्हें बड़ी विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ता है। कभी दरवाजे के दूसरी तरफ महिला होती है तो कभी पुरुष, और कार्यकर्ता हाथ में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियां लिए खड़े होते हैं।

हिचकिचाहट के मारे ऐसे में सामने वाले व्यक्ति को सरकार की योजना के बारे में समझाना और सामान बेच पाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने इसे अपने मान और प्रतिष्ठा के खिलाफ मानते हुए घर-घर जा कर कंडोम बेचने से इंकार किया।


परिवार नियोजन के लिए गर्भनिरोधक गोलियां या कंडोम आपके घर तक पहुंचाने की सेंट्रल मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की इस योजना में अब एक नया मोड़ आ गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश के भोपाल संभाग को चुना गया था। इन संभाग के आठ जिलों में आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गर्भनिरोधक साधन बेचने थे।

यह निर्णय मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ ने एक सर्वे के बाद लिया गया था। जो वर्ष 2010-11 में हुआ था। सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 34 राज्यों में से 22 राज्यों में परिवार नियोजन के साधनों के उपयोग में भारी कमी आई है। इन राज्यों में मध्यप्रदेश भी शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से गर्भनिरोधक गोली और कंडोम बंटवाने की योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनाई गई थी।


इसकी वजह ग्रामीण क्षेत्रों में उन दवा दुकानों की कमी होना था, जहां गोलियों और कंडोम की बिक्री होती हो। स्वास्थ्य संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ ने फिलहाल 17 राज्यों के 233 सोशल मार्केटिंग प्रोजेक्ट चुने थे। अधिकारियों के मुताबिक इन प्रोजेक्ट से करीब 70 फीसदी आबादी लाभान्वित होनी थी।

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