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माशिमं में पुराने कैमरों का पता नहीं, नए लगवाए गए

8 वर्ष पहले
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भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) में अधिकारियों व कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए 15 कैमरे लगा दिए गए हैं। इसके बाद भी विद्यार्थियों को इनका फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। उन्हें आए दिन डुप्लीकेट मार्कशीट, माइग्रेशन, करेक्शन आदि के लिए चक्कर लगाते हुए देखा जा सकता है।


बताया जाता है कि इन कैमरों को लगाने पर करीब 9 लाख रुपए मंडल ने खर्च किए हैं। वहीं, कार्यपालन यंत्री जेआर खान का कहना है कि पूर्व में जो कैमरे लगाए गए थे, वे पुराने होने के कारण बदल दिए गए हैं। जनसंपर्क अधिकारी एसके चौरसिया का कहना है कि पूर्व में कैमरे केवल स्ट्रांग रूम सहित कुछ स्थानों पर ही लगाए गए थे। इस बार सभी फ्लोर पर लगाए गए हैं।



पैसे का दुरुपयोग: वर्तमान में लगाए गए कैमरों पर इतना खर्च कर माशिमं ने साबित कर दिया है कि विद्यार्थियों के पैसे का किस तरह दुरुपयोग किया जाता है। पूर्व में लगाए गए कैमरों के बारे में कोई भी अधिकारी स्पष्ट नहीं कह रहा है कि उनकी संख्या कितनी थी, कितना पैसा खर्च हुआ था? अब अचानक 9 लाख रुपए तो खर्च कर दिए गए पर विद्यार्थियों के हित में इनका क्या उपयोग होगा, यह सवाल भी सामने आ रहा है।

अनुमति से चालू होगा: माशिमं के सभी सेक्शन, गैलरी, एग्जाम कंट्रोलर के कमरे के बाहर, अध्यक्ष, सचिव के आफिस के बाहर कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि स्ट्रांग रूम में लगाए गए कैमरे को अध्यक्ष व सचिव की बिना अनुमति के चालू नहीं किया जा सकता है।