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डाउनलोड करेंसिरोंज(विदिशा)। रकाबगंज मस्जिद शहर के रकाबगंज मोहल्ले में स्थित है। मोहल्ले के नाम पर ही इस मस्जिद का नाम प्रचलित है। पुरानी बस्ती के लिहाज से यह पूर्व दिशा में है। वर्तमान समय में इस मोहल्ले में गद्दी समाज बड़ी संख्या में आबाद हैं। नई आबादी के कारण इसका नाम नयापुरा पड़ गया। इसमें एक इकहरी मस्जिद लदाव की है, जिसमें तीन मेहराब और तीन गुंबद हैं।
इसके आंतरिक भाग की लम्बाई 43 फीट व चौड़ाई 17 फीट है। इसी तरह बाहरी भाग की लम्बाई 43 एवं चौड़ाई 23 फीट है। मस्जिद के पुराने हिस्से की दीवारेंं चूने और ईंटों की बनी हुई हैं। अंदर और बाहर दोनों ओर चूने का प्लास्टर है, जो मस्जिद की मजबूती को बढ़ा देता है। मध्य में स्थित मेहराबी दरवाजे पर उभरे हुए अक्षरों में अरबी में आयत लिखी हुई है।
मस्जिद में एक शिलालेख भी है। जिस पर शाहजहां के काल की बनी हुई इस मस्जिद के निर्माण की तारीख 1067 हिजरी लिखी हुई है। इससे यह माना जा सकता है कि यह मस्जिद 368 वर्ष पुरानी है। रकाबगंज मस्जिद के बराबरी में एक मकबरा भी है, जो मोहम्मद साहेल सिद्धीकी साहब का है। मकबरे के दक्षिणी भाग में एक दरवाजा है व तीन ओर लाल पत्थर की बारीक जालियां लगी हुई हैं। मकबरे के शिलालेख पर 1068 हिजरी लिखा हुआ है।
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