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सोयाबीन की फसल पर वैज्ञानिक कर रहे अनुसंधान

8 वर्ष पहले
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टीकमगढ़। जायका परियोजना के तहत सोयाबीन की उन्नत तकनीक के लिए कांटी गांव में शोध किया जा रहा है। यहां पर एजी कॉलेज टीकमगढ़ और जापान के वैज्ञानिक मिलकर अनुसंधान कर रहे हैं। हाल ही में दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कांटी गांव में सोयाबीन की फसल का जायजा लिया। इसके अलावा अगस्त के पहले सप्ताह में जापान वैज्ञानिकों का एक विशेष दल कांटी गांव का दौरा करेगा।


कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ.. एसएस गौतम ने बताया की जायका परियोजना के तहत जापानी कृषि वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने कांटी गांव में सोयाबीन को लेकर परीक्षण किया जा रहा है। जिसमें उत्पादन की तकनीक, बीज की गुणवत्ता और कम समय में तैयार होने वाली फसल के बीज का जायजा लिया जा रहा है।


इसके लिए कांटी में 6 किसानों के खेत में प्रदर्शित बीज बोया गया है। जहां पर तकनीकी को तीन स्तर में बांटा है। हर एक तकनीक में दो किसान हैं। वैज्ञानिकों का दल इन फसलों का समय-समय जायजा ले रहा है और इनकी बारीकियां नोट की जा रही हैं। वैज्ञानिकों की मौजूदगी में लगाई गई इन तकनीकियों का विश्लेषण उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड की जलवायु के अनुरूप यदि तकनीकी सफल हो गई तो इसका किसानों को लाभ मिलने लगेगा।



सोयाबीन को लेकर उम्मीद: केंद्र प्रभारी डॉ. गौतम ने बताया कि क्षेत्र में सोयाबीन को लेकर अच्छी उम्मीदें हैं। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत प्रदेश के पांच जिले को शामिल किया गया है। जिसमें टीकमगढ़ भी शामिल है। ऐसा होने से सोयाबीन की उत्पादकता में वृद्धि हो सकेगी। फसल को लेकर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आरके प्रजापति किसानों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।