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डाउनलोड करेंभोपाल। प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों को मुख्य बजट के बाद अनुपूरक बजट में को राशि बढ़ाकर नहीं दी। मुस्लिम संस्थाओं ने सरकार को 56 लाख रुपए का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, जबकि वित्त वर्ष 2012-13 के मुख्य बजट में मदरसा बोर्ड के लिए मात्र एक हजार रुपए का इजाफा किया गया।
बोर्ड को उम्मीद थी कि वेतनमान बढ़ाए जाने के बाद अनुपूरक बजट में बढ़ोत्तरी होगी, लेकिन ऐसा न होने से निराशा ही हाथ लगी। मप्र अल्पसंख्य आयोग को 6 लाख रुपए बढ़ाकर दिए गए। इसके बाद सरकार ने मप्र उर्दू एकेडमी, हज कमेटी, वक्फ बोर्ड तथा मदरसा बोर्ड के बजट में कोई बढ़ोत्तरी ही नहीं की।
इधर मप्र मदरसा बोर्ड पूरी तरह कर्ज में डूबा हुआ है। उसे राज्य ओपन स्कूल के 1 करोड़ रुपए देना है, जबकि पूर्व से ही उस पर विभिन्न संस्थाओं के करोड़ों रुपए बकाया चल रहे हैं। राज्य ओपन स्कूल दो साल से परीक्षा शुल्क की यह राशि मांग रहे हैं। इसके लिए बाकायदा नोटिस भी जारी किए गए।
ये है कहानी
राज्य सरकार मदरसा बोर्ड को 12 लाख रुपए वार्षिक अनुदान के रूप में देती है। बोर्ड बीते दो सालों से 56 लाख रुपए की मांग कर रहा है। पर शासन ने केवल एक हजार रुपए बढ़ाए। मसलन यह राशि 12 लाख एक हजार रुपए की गई। अब बोर्ड वेतन विसंगति को भी झेल रहा है। इस साल के शुरुआत में बोर्ड के कर्मचारियों ने इसको लेकर एक माह तक कार्यालय प्रागंण में हड़ताल की थी। बावजूद इसके कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
-अन्य संस्थाएं भी उपेक्षित
मदरसा बोर्ड की तरह ही अन्य संस्थाएं भी उपेक्षा की शिकार हैं। दो वित्तीय वर्षों में उर्दू अकादमी के बजट में किसी प्रकार की कोई वृद्धि ही नहीं की गई। जबकि मप्र उर्दू अकादमी शासन से ही अनुदान प्राप्त संस्था है। 2012-13 व 2013-14 में शासन से 55 लाख रुपए अनुदान के रूप में मिले। अकादमी ने चालू वित्तीय वर्ष का खर्च आंकलन करने के बाद शासन से 85 लाख रुपए की मांग की थी। ऐसी ही अन्य अल्पसंख्यक संस्थाएं हैं, जिन्हें उनकी मांग के अनुरूप बट स्वीकृत नहीं किया गया।
हास्यास्पद लगता है
सरकार से जैसी उम्मीद थी, उसके हिसाब से बजट स्वीकृत नहीं किया गया। केवल एक हजार रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है, जो हास्यास्पद लगता है। 12 लाख से कुछ नहीं होता, हमने 56 लाख रुपए स्वीकृति का प्रस्ताव दिया था।
राशिद खान, अध्यक्ष,मदरसा बोर्ड
ज्यादा होता है खर्च
सभी प्रकार के भुगतान की बात करें तो कुल प्रतिवर्ष हमें 85 लाख रुपए की आवश्यकता होती है। इसमें अन्य व्यय को जोड़े जाएं तो यह राशि करीब सवा करोड़ से अधिक हो जाता है। मात्र 55 लाख रुपए ही शासन ने बजट स्वीकृत किए।
मोहम्मद सलीम कुरैशी,अध्यक्ष मप्र उर्दू अकादमी
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