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भाषा के विकास में तकनीकी संसाधनों की अहम भूमिका

8 वर्ष पहले
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वरिष्ठ पत्रकार राहुलदेव ने कहा कि किसी भी भाषा के विकास में तकनीकी संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कम्प्यूटर आधारित तकनीक भाषा के विकास में अहम होती जा रही है, इसलिए हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के शब्द संशोधक भाषा के विकास की अहम कड़ी होंगे।


भोपाल। राहुल देव यहां माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित हिंदी के प्रथम ओपन सोर्स स्पेल चेक साफ्टवेयर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। पत्रकारिता विश्वविद्यालय की एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करते समय हिंदी के शब्दों को लिखते समय होने वाली वर्तनी की त्रुटियों को दूर करने के लिए इसे तैयार किया है। इस साफ्टवेयर का नामकरण माला शब्द शोधक (माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी शब्द संशोधक) किया गया है।


कार्यक्रम का आयोजन पं.मदनमोहन मालवीय की जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि के अवसर पर किया गया था। श्री देव ने कहा कि भारत भाषायी विविधता वाला देश है। भारतीय भाषाओं को विकास के लिए तकनीक आधारित विकास पर जोर देते हुए वर्तनी शोधक तैयार करना चाहिए। हिंदी में तैयार किया गया यह शब्द संशोधक केवल पत्रकारिता के लिए ही नहीं बल्कि हिंदी के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेगा। इस अवसर पर साफ्टवेयर निर्माण दल के सदस्यों सर्वश्री अनुराग सीठा, रवि रतलामी, महेश परिमल एवं मनीष माहेश्वरी ने उसके अनुप्रयोग के बारे में प्रस्तुति दी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पूर्व सचिव उदय वर्मा ने कहा कि हिंदी कठिन किंतु वैज्ञानिक भाषा है। ऐसा माना जाता है कि विकसित एवं अविकसित भाषाओं में मुख्य अंतर यह होता है कि विकसित भाषा में कम अक्षर होते हैं। हिंदी में अधिक अक्षर होने के बावजूद भी इसका वर्तनी शोधक तैयार कर लेना एक बड़ी उपलब्धि है।


विवि के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हिंदी के विकास एवं विस्तार में अब तकनीकी संसाधन महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। इसलिए विश्वविद्यालय ने यह साफ्टवेयर तैयार किया है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर यह साफ्टवेयर ओपन सोर्स के अंतर्गत उपलब्ध है। हिंदी प्रेमी इसमें आवश्यक सुधार-परिवर्तन करते हुए इसके नए संस्करण तैयार कर हिंदी के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।