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लोकरंग की तैयारियां जोरों पर

8 वर्ष पहले
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भोपाल। रवींद्र भवन में 26 जनवरी से शुरु होने जा रहे पांच दिवसीय 'लोकरंग समारोह' में आयोजित समवेत नृत्य प्रस्तुति तथा तार वाद्यों की विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति की रिहर्सल श्यामला हिल्स स्थित मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय और रवींद्र भवन में लोकरंग के मंच पर चल रही है।

विगत वर्षों से लोकरंग समारोह में नृत्य की लोक बहुविध परंपराओं को किसी एक विषय पर बुनते समवेत रूप से प्रस्तुत किया जाता रहा है। इस वर्ष समारोह के 29वें वर्ष में मध्यप्रदेश के पवित्र स्थलों एवं सांस्कृतिक बहुविध कलारूपों को समवेत रूप से तैयार कर प्रस्तुत किया जा रहा है।


संयोजित विशेष प्रस्तुति में अमृत मध्यप्रदेश में ओरछा, मैहर, दतिया, ओंकारेश्वर, उज्जैन, अमरकंटक, चित्रकूट, सांची, हुसैन टेकरी और कुण्डलपुर की शैव, शाक्त, वैष्णव, जैन, इस्लाम और बौद्ध परम्परा से सम्बन्धित कथाओं सम्बद्ध सांस्कृतिक एक सूत्रात्मकता, जनपदीय जीवन-आचरण और उससे उपजी बहुवर्णी कलाओं के विविध रूप प्रकट होंगे। इस नृत्य प्रस्तुति में लगभग 125 जनजातीय व लोक कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। नृत्य प्रस्तुति का निर्देशन लोकेंद्र त्रिवेदी, वरिष्ठ नाट्य निदेशक-नई दिल्ली का है। इसमें संगीत निर्देशन संगीतकार उमेश तरकशवार का है।


इसके साथ ही पारम्परिक रूप से देश में प्रचलित तार वाद्यों के साथ प्रदेश के जनपदीय गीतों की लोकधुनों को तैयार कर विशेष प्रस्तुति 'किन्दरा' संयोजित है। इस प्रस्तुति में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कश्मीर आदि राज्यों से आये लगभग 80 लोक एवं समकालीन कलाकार द्वारा वाद्यों बाना, चिकारा, बेन्जो, रावण हत्था, कमायचा, मोरचन्द, सुरींदा, सिंघी, सारंगी, रबाब, एकतारा, तम्बुरा, रेकडिय़ा, नगाडिय़ा के अलावा सितार, सरोद, सारंगी, संतूर, विजन आदि वाद्यों पर ताल-लय का अभ्यास किया जा रहा है। इसके म्यूजिक डायरेक्टर अनिल मिश्रा हैं।