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सिर्फ इस्तीफा नामंजूर होना सब इंसपेक्टर अमृता को नामंजूर, अदालत जाएंगी!

8 वर्ष पहले
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विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव पर्यवेक्षक के साथ हुए विवाद के बाद चर्चाओं में आईं सब इंसपेक्टर अमृता सोलंकी अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। इस विवाद के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था, जिसे 20 जनवरी को नामंजूर कर दिया गया। अमृता चुनाव पर्यवेक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर अड़ी हुई हैं।

भोपाल। शुक्रवार को डीजीपी को आवेदन सौंपने अमृता सोलंकी भोपाल पहुंचीं। हालांकि वे डीजीपी नंदन दुबे से व्यक्तिगत नहीं मिलीं, लेकिन उन्होंने पुलिस मुख्यालय में उनके नाम एक आवेदन दिया है। इसमें तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। कहा गया है कि यदि इन तीन दिनों में उनके मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाईकोर्ट जाएंगी।

यह है मामला
22 नवंबर, 2013। इलेक्शन के दौरान ब्यावरा के पगारी बगला चैकिंग प्वाइंट पर तात्कालीन मलावर(जिला राजगढ़) थान प्रभारी अमृता सोलंकी के संग तात्कालीन चुनाव पर्यवेक्षक गया प्रसाद की कथित बद्तमीजी के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। इस घटना से क्षुब्ध होकर अमृता ने 23 नवंबर, 2013 को अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था, जिसे करीब दो महीने बाद यानी 20 जनवरी, 2014 को पुलिस विभाग ने अपर्याप्त कारण बताते हुए नामंजूर कर दिया।

मैं चुप क्यों बैठूं
अमृता ने दैनिकभास्कर डॉट को बताया कि, पुलिस प्रशासन उनके मुद्दे को भटका रहा है। इस्तीफा उनका मुद्दा था ही नहीं, वे तो गयाप्रसाद के खिलाफ कार्रवाई चाहती हैं। अमृता ने तल्ख लहजे में कहा कि, इस्तीफा नामंजूर होना मेरे साथ कोई न्याय नहीं है। मैं तब तक नौकरी ज्वाइन नहीं करूंगी, जब तक इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती।

आधी रात को कहां से लौट रहे थे पर्यवेक्षकः

पिछले दिनों एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि जिस पर्यवेक्षक की गाड़ी उन्होंने रोकी थी, वह आधी रात को कहां से लौट रहे थे? इसकी जांच करने की बजाए प्रशासन ने मेरे खिलाफ ही एक्शन ले लिया। आला अधिकारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए एक छोटे कर्मचारी की बलि चढ़ा दी। अपने साथ हुए इस अन्याय से नाराज अमृता ने कहा कि मैं महिला बाद में हूं एक पुलिस अधिकारी पहले हूं।


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