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वतन से प्यार है

7 वर्ष पहले
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यह कविता हमें भेजी है सुखदेव सोनवणे उर्फ पवन बाबू भोपाली ने। देशभक्ति गीत लेखन के लिए पहचाने जाने वाले सुखदेव हिंदी के अलावा मराठी में भी लेखन कार्य करते हैं।



वतन से मुहब्बत है, वतन से प्यार है ।
हर नौजवां की जां, वतन पर निसार है।।


हर रंग के खिले यहां, फूल देखिये।
खुशबू है भाईचारे की, सदा बहार है।।


जय जवान-जय किसान, बुलंद वो नारा है।
कारगिल जंग याद, ताशकन्द करार है।।


सुखदेव, लक्ष्मी बाई, आजाद, भगत सिंग।
शहीदों की शहादत, अब भी करार है।।


आने न देंगे आंच, आजादी की शान पर।
सौगात शहीदों से मिली, बेशुमार है।।


लहराता रहेगा तिरंगा, आसमान पर।
भारतीय गणतंत्र सदा, बरकरार है।।


है तमन्ना सरफरोशी की, अब भी ए पवन।
सर हथेली पे अपना, लेकर तैयार है।।