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सुप्रसिद्ध रंगकर्मी केएन पणिक्कर के रंगकर्म में अवदान पर थिएटर फेस्टिवल 3 फरवरी से

7 वर्ष पहले
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भोपाल। मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग शीर्ष रंग निर्देशकों के कला में अवदान को धरोहर के रुप में सहेजने का काम कर रहा है। इसी उद्देश्य से रंग सोपान श्रंखला शुरू की गई है। पिछले वर्ष इस श्रंखला में सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक रतनथियाम पर केंद्रित समारोह हुआ था। इसी श्रंखला में इस बार सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक कावलम नारायण पणिक्कर के रंग अवदान पर केंद्रित नाट्य समारोह रंग सोपान-2 का आयोजन भारत भवन में किया जाएगा।


इस तरह से होंगे नाटक: 3 से 9 फरवरी तक होने वाले समारोह में नाटकों का मंचन अंतरंग सभागार में होगा। उनकी रंगयात्रा पर केंद्रित प्रदर्शनी रंगदर्शनी दीर्घा में लगेगी। सोपानम रंग समूह द्वारा 3 फरवरी को 'संगमणियम' नाटक का मंचन किया जाएगा। 4 फरवरी को संस्कृत नाटक प्रतिमा की प्रस्तुति होगी। 5 फरवरी को मलयालम नाटक कल्लरूट्टी का मंचन होगा। 6 फरवरी को संस्कृत नाटक उरुभंगम का मंचन होगा। 7 फरवरी को मलयालम नाटक का मंचन होगा। 8 फरवरी को हिंदी नाटक 'छाया शाकुंतलम् का मंचन होगा। 9 फरवरी को हिंदी नाटक उतररामचरितम् की प्रस्तुतियां होंगी।
संस्कृति संचालनालय द्वारा आयोजित समारोह में 8 फरवरी को सुबह 10:30 बजे 'दृष्टि और दर्शनÓ विषय पर संवाद होगा। इसमें रतन थियाम, वामन केंद्र, रुद्रप्रसाद सेन गुप्त, सुरेश शर्मा और अशोक वाजपेयी होंगे। 9 फरवरी को रंगमंच में नृत्य और संगीत पर केएन पणिक्कर के योगदान पर विमर्श होगा। इसमें वक्ता जयराजन, जयप्रभा मेनन, संगीता गुंदेचा, अब्राहम और सिद्धार्थ सिन्हा होंगे। 9 फरवरी को ही सुबह के सत्र में केएन पणिक्कर के बेटे कावलम श्री कुमार सोपानम संगीत की प्रस्तुति भी देंगे। भारत भवन के पूर्वरंग में बाहर ओपन कैंपस में एक मंच बनाया जाएगा। जहां रोजाना 6:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक केरल के कलारुप थय्यम की प्रस्तुति होगी। अंतरंग सभागार में रोजाना शाम 7:00 बजे से नाटक की प्रस्तुति होगी।

के एन पणिक्कर के बारे में: तिरूवनंतपुरम में रहने वाले सुविख्यात रंग निर्देशक कावलम नारायण पणिक्कर का भारतीय रंगमंच में महत्वपूर्ण स्थान है। वे रंग निर्देशक, कवि, केरल की लोककलाओं एवं संगीत के विशेषज्ञ तथा मोहिनीअट्टम नृत्य के गुरु भी थे। रंगकर्म के क्षेत्र में उनके अवदान के लिए मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग ने 1995 में नाट्य निर्देशन के लिए कालिदास सम्मान से अलंकृत किया था। 1997 में भारत सरकार ने पद्मविभूषण की उपाधि से विभूषित किया था। श्री पणिक्कर पिछले पांच दशकों से नाट्य निर्देशन, फिल्म संगीत, कविता नाटक लेखन और अनुवाद का काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त श्री पणिक्कर की उम्र इस वक्त 85 वर्ष है। इस समय भी वे सक्रिय हैं। वे सोपानम रंग समूह का संचालन कर रहे हैं।