अपने अनूठे तरीके से रंग-आंदोलन की अलख जगाने वाले रंगकर्मी चंद्रहास तिवारी 5 नवंबर, 2013 को जिंदगी के रंगमंच से पर्दा गिरा गए थे। शनिवार 13 सितंबर को उनका जन्मदिन था। रंगकर्म की एक अलग पहचान रहे चंद्रहास को श्रद्धांजलि देती स्टोरी...
भोपाल। संघर्षशील,अनुशासित, मिलनसार, अभिनेता, रंग निर्देशक चंद्रहास तिवारी। जिनकी सांसों में रंगकर्म और संवादों में साहित्य व रंगभाषा की महक थी। वह महज एक नाम नहीं, समकालीन हिंदुस्तानी रंगकर्म की जीती जागती परिभाषा था। रंगमंच में अनुभवों का संसार समेटे, रंग-आंदोलन की अलख जगाते 34 वर्षीय युवा रंगकर्मी चंद्रहास तिवारी 5 नवंबर को रंगमंच से पर्दा गिरा गए थे। वे अब हमारे बीच नहीं है। वे अपने पीछे पत्नी प्रीति ,बेटी स्तुति, बेटा आरंभ, द राइजिंग सोसायटी आर्ट एंड कल्चर और सैकड़ों रंगकर्मी शिष्यों की जमात छोड़ गए।
13 सितंबर को उनके जन्मदिन पर जहां उनके दोस्तों ने उन्हें याद किया। वहीं द राइजिंग सोसायटी आर्ट एंड कल्चर में उनके शिष्यों और कलाकारों ने भारत भवन में शाम 7.00 बजे शनिवार को चंद्रहास द्वारा निर्देशित नाटक तर्पण का प्रदर्शन किया। उन्होंने नाटक के जरिए वरिष्ठ रंगकर्मी चंद्रहास तिवारी के योगदान को बताया।
चंद्रहास के बारे में...
चंद्रहास ने एसएटीआई (विदिशा) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे (एफटीआईआई) से एक्टिंग का कोर्स किया था। इसके अलावा श्रीराम सेंटर दिल्ली, भारत भवन, रंगशीर्ष से भी प्रशिक्षित हुए। उन्होंने एक सार्थक, सृजनात्मक रंगकर्म की अलख जगाई थी और अनेक रंगकर्मियों के साथ एक हिंदी क्षेत्र का नया रंग मुहावरा गढ़ा और उसे सजाया संवारा। द राइजिंग सोसायटी आर्ट एंड कल्चर में नया रंग भरना, नए कलाकारों को रंगकर्म की जुबान समझाने वाला जुझारू व्यक्तित्व, अनुशासन प्रिय, समय का पाबंद, जीवटता से भरपूर, प्रयोग धर्मिता उनके व्यक्तित्व की खासियत थी। लौटकर याद करने पर ऐसा इंसान नजर आता है, जिसकी निगाहें आप पर पड़े तो आप हमेशा के लिए उसी के हो जाएं।
वे गंभीर बात को सहज रूप में व्यक्त करते थे। उन्होंने कलाकारों की कलात्मकता को जस का तस नहीं रखा, बल्कि उसका सार्थक परिष्कार कर अपनी रंग चेतना से स्वयं एवं उन्हें भी समृद्ध किया। उन्हें अपने फलक को विस्तार दिया। वे एफटीआईआई, राज्य नाट्य विद्यालय में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में भी एक्टिव रहे। रंगमंच से निकलकर सिनेमा के पर्दे पर भी उन्होंने अपने अभिनय की चमक बिखेरी। वे एड फिल्म और टेलीविजन में भी सक्रिय रहे।
फिल्म : माय फ्रेंड पिंटो, चोर-चोर सुपर चोर, वो सुबह किधर गुजर गई, फोटो और शंघाई जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।
टीवी सीरियल : उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के उपन्यास पर आधारित टीवी सीरियल में महत्वपूर्ण किरदार निभाया था।
एड फिल्म : ब्रिटानिया बिस्किट, मैक डोनाल्ड, म्युच्युल इन्वेस्टमेंट
प्रमुख नाटक : आई एम सुभाष, गाजीपुर की हसीना, प्लीज मत जाओ, ये आदमी ये चूहे, डाक बाबू, सूर्यास्त, कविता में मध्यप्रदेश, एक और दुर्घटना, परसाई के किस्से, ध्रुव स्वामिनी, काल वासंसी जीर्णानी, मिस्टर तापस, लोअर डेफ्थ, यहूदी की लड़की, अंधा युग, खामोश अदालत जारी है, कोर्ट मार्शल, मुझे अमृता चाहिए, आत्महत्या, खिलावन का नरक, थिएटर, अंतिम यात्रा का तौलिया, गुडिय़ा रानी और कहानी की प्रस्तुतियों में मुक्ति, मांस का दरिया, भ्रष्टाचार, बड़े भाई साहब, गुल्ली डण्डा, जातक, बाकी इतिहास, नाक, तर्पण, गणपति बप्पा प्रमुख हैंं।
जन्म
13 सितंबर1979
मृत्यु
5 नवंबर 2013
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