(PIC: संगोष्ठी में बोलतीं मंत्री माया सिंह।)
भोपाल। बालिका भ्रूण का परीक्षण करने वाले सोनोलॉजिस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए। उसका लाइसेंस निरस्त होना चाहिए। वहीं बालिका भ्रूण हत्या के लिए जिम्मेदार अभिभावक के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया जाए। यह बात मुख्य अतिथि महिला-बाल विकास मंत्री माया सिंह ने शनिवार को मप्र मानव अधिकार आयोग के 21वें स्थापना दिवस पर कन्या भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कही।
आयोग के प्राधिकृत अध्यक्ष डॉ. वीएम कंवर ने कहा कि लिंग प्रतिषेध अधिनियम का कड़ाई से पालन होना चाहिए । कन्या भ्रूण का पता लगाने के लिए पकड़ी गईं बहुत सारी सोनोग्राफी मशीन सील की जाना चाहिए। प्रकरण में अभियोजन की कार्यवाही को भी तेज करने की जरूरत है। मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने कहा कि भ्रूण हत्या सबसे निकृष्ट अपराध है।
पीएनडीटी एक्ट को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी प्रदेश हर कलेक्टर की है। आयोग के सचिव विनोद कुमार ने कहा कि आयोग के कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के प्रतिनिधि तेजराम जाट ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या एक विकृति है। शिशु लिंगानुपात पिछले तीन दशक में सबसे तीव्र गति से गिरा है सोनोग्राफी मशीनें इसका सबसे बड़ा कारण हैं।
पुलिस महानिदेशक नंदन दुबे ने कहा कि हमें कन्याओं को आगे बढ़ने के पूरे अवसर देना होंगे।
कन्या भ्रूण हत्या सोचा.समझा कृत्य है, जो हमारी आपराधिक मानसिकता की पहचान है। इसे जड़ से समाप्त करने के लिए एक सशक्त सामाजिक आंदोलन की जरूरत है। परिचर्चा में इंदौर कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण करने पर इंदौर में किए जा रहे कामों पर प्रकाश डाला।
अगर आपके पास भी है कोई जानकारी/खबर या फोटो तो हमें वाट्सएप नंबर 8462002585 पर शेयर करें अथवा मेल करें bplhyper@gmail.com।