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गैस त्रासदी से जुड़े मामलों का निराकरण कर पुराने शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जाए

7 वर्ष पहले
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भोपाल। गैस त्रासदी का दंश झेल रहे लोगों को अब भी उम्मीद है कि अब स्मार्ट सिटी के जरिए भोपाल की नई पहचान बन सकती है। इसकी शुरुआत भी यूनियन कार्बाइड के कचरे का निपटारा कर की जानी चाहिए। लिहाजा अब इन क्षेत्रों में फिर से विकास की नई योजना के जरिए ही शहर को स्मार्ट सिटी में तब्दील किया जा सकता है।

दैनिक भास्कर द्वारा स्मार्ट वार्ड- स्मार्ट सिटी विषय पर रविवार को वार्ड 13,14,15 और 16 के लिए आयोजित रूबरू कार्यक्रम में ऐसे ही कई सुझाव लोगों ने दिए हैं। छोला रोड पर धर्मकांटा के पास स्थित अग्रवाल धर्मशाला में लोगों ने अपने-अपने वार्ड की मुख्य समस्या को आगामी नगरीय निकाय चुनाव के एजेंडे में शामिल करने की बात कही। उन्होंने विकास को तरजीह दी, लेकिन निगम की कार्यप्रणाली पर भी जमकर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि निगम जो सड़कें बनाता है, वो तुरंत ही उखड़ने लगती हैं। इसलिए विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अफसरों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

इस मौके पर वार्ड 13 से पार्षद और एमआईसी सदस्य पंकज चौकसे, वार्ड 15 से पार्षद और एमआईसी सदस्य विष्णु राठौर और वार्ड 16 की पार्षद रजिंदर कौर मौजूद थे। तीनों जनप्रतिनिधियों ने शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लोगों को भी जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा।
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फोटो - एचसी वर्मा।
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