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अप्रवासी भारतीय के एक फैसले से साईं भक्तों क्रोधित, पढ़ें क्या है मामला...

7 वर्ष पहले
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(PIC: बालाजीपुरम में स्थित साईं मंदिर में जड़ा ताला।)
भोपाल। बैतूल जिले के बैतूलबाजार क्षेत्र (बालाजीपुरम) में बने मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने के फैसले के विरोध में सोमवार को साईं भक्तों ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान साईं भक्तों ने कोठीबाजार के लल्ली चौक पर शंकराचार्य स्वरूपानंद का पुतला भी फूंका। उन्होंने चेतावनी दी कि, अगर मंदिर से साईं की प्रतिमा हटाई गई, तो कोई भी साईं भक्त बालाजीपुरम नहीं जाएगा।
समिति के सदस्यों ने कहा कि मंदिर संस्थापक के इस फैसले से साईं भक्तों को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि इससे कुछ भी अनहोनी हो सकती है। इसका जिम्मेदार कौन होगा? साईं भक्तों ने कलेक्टर को लिखित में ज्ञापन सौंपकर समस्या का निराकरण करने की मांग की है।

यह है मामला
बैतूल-नागपुर नेशनल हाईवे पर करीब 14 साल पहले बैतूलबाजार में अप्रवासी भारतीय सेम वर्मा ने करीब 7 एकड़ के क्षेत्र में बालाजी मंदिर निर्मित किया है। इस मंदिर को रुक्मणि बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां पर भगवान बालाजी के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनके अलग-अलग मंदिर भी बने हुए हैं। इसी बालाजीपुरम में साईं मंदिर भी है।
शंकराचार्य के साईं बाबा को पूजने योग्य न बताते हुए मंदिर से प्रतिमाएं हटाने का आह्वान करने और बाद में धर्म संसद द्वारा प्रतिमा हटाए जाने का फैसला आने पर सेम वर्मा ने बालाजीपुरम मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने का बयान जारी कर दिया था।

कब क्या हुआ
मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने का बयान
  • 1 सितंबर: बालाजी मंदिर के संस्थापक सेम वर्मा ने धर्म संसद के फैसले का समर्थन करते हुए बालाजी मंदिर मेंं स्थिति साईं मंदिर से बाबा की प्रतिमा हटाए जाने का बयान जारी किया था। उन्होंने कहा कि धर्म संसद का फैसला अहम है।
साईं भक्तों ने प्रतिमा हटाए जाने पर रोष जताया
  • 2 सितंबर: मंदिर संस्थापक सेम वर्मा के इस बयान के बाद साईं बाबा के भक्तों में रोष व्याप्त हो गया है। बैतूल के कोठीबाजार दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि सेम वर्मा के साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने के फैसले से समिति समेत साईं भक्तों को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि साईं बाबा में तमाम लोगों की आस्था है। बालाजीपुरम मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाई जाती है, तो समिति समिति का कोई भी सदस्य बालाजीपुरम में दर्शन करने नहीं जाएगा। उन्होंने इसे राजनीतिक पहलू भी करार दिया। चिचोली क्षेत्र की समिति ने भी प्रतिमा उन्हें सौंपे जाने की बात रखी। अब बालाजीपुरम मंदिर से साईं बाबा की प्रतिमा हटाए जाने के फैसले से एक बहस सी छिड़ गई है।
पूजा अर्चना बंद
  • 3 सितंबर: मंदिर प्रबंधन की ओर से मंदिर के मुख्य पुजारी असीम पंडा स्वामी ने कहा कि बालाजीपुरम मंदिर में पूजा-अर्चना आदि शंकाराचार्यों के दिशा-निर्देशों से होती है, इसलिए साईं बाबा की पूजा भी वैदिक विधि विधान से बंद कर दी गई है। लेकिन अभी साईं बाबा बालाजीपुरम में पूरे सम्मान के साथ विराजमान हैं। उनकी प्रतिमा को हटाने आदि से संबंधित विधि-विधान के बारे में विचार किया जा रहा है।
मंदिर में ताला लगाया
  • 6 सितंबर: मंदिर प्रबंधन ने साईं मंदिर में ताला लगा दिया।
21 सितंबर को को मंदिर प्रबंधन के बीच होगा फैसला
  • असीम पंडा ने कहा कि जहां तक बात स्थानीय साईं भक्तों के विरोध या प्रतिमा को मांगने के संबंध की है, तो मंदिर प्रबंधन सभी को आश्वासन देना चाहता है कि इस संबंध में एक बैठक का आयोजन शीघ्र ही किया जाएगा। इसमें सभी लोग मिलकर जो निर्णय लेंगे उसका पालन किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने सभी से अपील की है कि वे पत्र या सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी राय जरूर दें और बैठक की जब घोषणा हो, तो उसमें भी अवश्य अपना समय दें। मंदिर प्रबंधक ने इस संबंध में फैसला लेने 21 सितंबर को बैठक रखी गई है। इसमें धर्म संसद के पदाधिकारी शामिल होंगे।
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