पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जेनरेटर कोच के बदले राजधानी और शताब्दी में लगाए जाएंगे एक्सट्रा कोच

जेनरेटर कोच के बदले राजधानी और शताब्दी में लगाए जाएंगे एक्सट्रा कोच

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भोपाल। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में जल्द ही एक कोच की संख्या बढ़ाने जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सुविधा के बाद सीटों के लिए होने वाली मारामारी काफी हद तक कम हो जाएगी। रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों ही ट्रेनों में एक कोच लगाया जाएगा।

खुद बिजली की आवश्यकता पूरी करेगी नई तकनीक
इतना ही नहीं रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने इंजन में नई तकनीक विकसित की है। इसके माध्यम से इंजन खुद ही बिजली की आवश्यक आपूर्ति कर सकेगा। इस तकनीक के उपयोग में आते ही इंजन के पीछे लगने वाले दो जेनरेटर कार में से एक को हटा दिया जाएगा एवं इसके स्थान पर एक कोच को लगा दिया जाएगा।

होता रहता है कोचों की संख्या में बदलाव
समय और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में आमतौर पर कोचों की संख्या में बदलाव होता रहता है। खासतौर पर जयपुर शताब्दी में नौ कोच, भोपाल शताब्दी में 14 से लेकर 18 कोच, निजामुद्दीन-बेंगलुरू राजधानी में 18, नई दिल्ली-बिलासपुर राजधानी में 12 कोच होते हैं। इसके साथ ही शताब्दी और राजधानी में जेनरेटर कार भी लगा रहता है, जो एक रिजर्व जेनरेटर गार्ड कोच से जुड़ा होता है। जेनरेटर कार से सभी कोचों में बिजली की सप्लाई की जाती है।
कोच में पॉवर सप्लाई की क्षमता बढ़ाई गई
आज से लगभग एक साल पहले आरडीएसओ ने जेनरेटर कार का विकल्प खोजना शुरू किया था। नई तकनीक से तैयार किए गए ट्रेन के इंजन के माध्यम से कोच में पॉवर सप्लाई की क्षमता बढ़ाई गई। सफलता के बाद इस तकनीक वाले इंजन को सबसे पहले नई दिल्ली-कालका शताब्दी एक्सप्रेस में ट्रायल के रूप में शुरू किया गया। जेनरेटर कार के बदले ट्रेन के इंजन से सभी कोचों को ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचआई) लाइन से पॉवर सप्लाई किया जा रहा है। आरडीएसओ द्वारा विकसित नई तकनीक वाले इंजन में, दो में से एक जेनरेटर कार की जरूरत नहीं होगी। एक जेनरेटर कार गार्ड हटाने के बाद, इसके बदले शताब्दी और राजधानी में नया कोच लगाया जा सकेगा।
रेलवे को होगा इसका फायदा
इस तकनीक से रेलवे को काफी हद तक फायदा होगा, क्योंकि जेनरेटर कार को डीजल से चलाया जाता है। अगर कोचों और पैंट्री कार को बिजली की सप्लाई इंजन से सीधे होगी तो इससे डीजल की बचत होगी एवं प्रदूषण भी कम होगा। अब तक जेनरेटर कार से ही कोचों में पॉवर सप्लाई किया जाता था।
पैंट्री कार को भी होगी बिजली सप्लाई
इंजन में काफी कुछ बदलाव किए जाने से जो तकनीक विकसित की गई है, उससे इंजन से सभी कोचों को पॉवर सप्लाई किया जाएगा। इससे जेनरेटर कार की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। यहां तक की पैंट्री कार को भी पॉवर की सप्लाई इसी तकनीक के माध्यम से हो सकेगा। जानकारी के अनुसार डीजल इंजन से एसी कोचों को पॉवर सप्लाई का काम चल रहा है। जल्द ही इंजनों में मामूली बदलाव कर इस काबिल बना दिया जाएगा।
अगर आपके पास भी है कोई जानकारी/खबर या फोटो तो हमें वाट्सएप नंबर 8462002585 पर शेयर करें अथवा मेल करें bplhyper@gmail.com।