भोपाल। पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण करती हिन्दी, अंग्रेजी की लघु पुस्तिका एवं '
जम्मू कश्मीर की वास्तविकता-प्रतिमाएं एवं मीडिया की भूमिका' विषयक राष्ट्रीय संविमर्श के प्रतिवेदन का लोकार्पण दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में हाल ही में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर धारा 370 पर परिसंवाद का आयोजन भी किया गया। यह कार्यक्रम
जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र, नई दिल्ली तथा माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विवि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर जम्मू कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक जवाहरलाल कौल, आशुतोष भटनागर, वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जम्मू कश्मीर एवं धारा 370 विषयों के विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता अरूण कुमार रहे। वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. कुठियाला ने कहा कि जम्मू कश्मीर के विषय में गलत धारणाओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
विवि द्वारा धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए एक शोध कार्य सम्पन्न कराया गया है। यह शोध कार्य वरिष्ठ पत्रकार संत कुमार शर्मा द्वारा किया गया है। इस शोध कार्य के निष्कर्षों पर आधारित लघु पुस्तिका 'धारा 370 के प्रभावों का विश्लेषण' तथा इसका अंग्रेजी अनुवाद 'इंपेक्ट एनालिसिस ऑफ आर्टिकल 370' का लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर आयोजित परिसंवाद 'धारा 370 के प्रभाव' का विषय प्रवर्तन करते हुए आशुतोष भटनागर ने कहा कि भारतीय संविधान में धारा 370 के प्रावधानों तथा इसे हटाए जाने संबंधी उल्लेख भी किया गया है, परंतु इसे लगातार बनाए रखने का भ्रम फैलाया जा रहा है। धारा 370 पर अधिकांश वे बाते होती हैं जो उसमें है ही नहीं। इसे बनाए रखने अथवा हटाए जाने पर आज तार्
किक बहस की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता अरूण कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर के मुद्दों को लेकर सही जानकारी का अभाव है। आज इस विषय पर कानूनी प्रपत्रों के आधार पर चर्चा होने की आवश्यकता है। इस विषय पर तीन पक्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं- शिक्षा जगत, कानूनविद एवं मीडिया।
अगर आपके पास भी है कोई जानकारी/खबर या फोटो तो हमें वाट्सएप नंबर 8462002585 पर शेयर करें अथवा मेल करें bplhyper@gmail.com।