भोपाल। भोपाल शहर से महज दस किमी की दूरी पर सात बाघों के मूवमेंट और उनकी सुरक्षा को लेकर वन विभाग चिंतित हो गया है। समरधा रेंज के उन स्थानों को चिन्हित किया जाएगा जहां बाघ का मूवमेंट अधिक है। इसके लिए एक सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद चिन्हित स्थानों पर वन चौकियां बनाई जाएगी। वन विभाग इसके लिए एक टाइगर प्रोटेक्शन एक्शन प्लान तैयार कर रहा है। यह प्लान वाइल्ड लाइफ मुख्यालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भेजा जाएगा।
भोपाल वन मंडल में घूम रहे बाघों की सुरक्षा के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। लगातार बढ़ रहे बाघों की संख्या को देखते हुए समरधा रेंज के लिए टाइगर प्रोटेक्शन एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। समरधा रेंज के रेंजर जितेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि रेंज में दो बाघ, दो बाघिन और तीन शावक मूवमेंट कर रहे हैं। रिजर्व एरिया न होने से रेंज में टाइगर की सुरक्षा के लिए अलग से कोई प्लान नहीं है। रेंज में न वन चौकियां है न ही टाइगर मूवमेंट पर नजर रखने के लिए बेहतर संसाधन।
सही मॉनिटरिंग के लिए तैयार होगा अलग दस्ता
सीमित स्टॉफ के साथ टाइगर मॉनिटरिंग वैसी नहीं हो पाती जैसी टाइगर रिजर्व के इलाके में होती है। स्टॉफ को टाइगर मॉनिटरिंग के अलावा वानिकी, वाटर होल बनाना, कूप काटना प्लांटेशन करना, अवैध कटाई रोकना, जब्ती करना, रोड बनवाना जैसे कई काम करना पड़ते हैं। उनका कहना है कि टाइगर प्रोटेक्शन एक्शन प्लान बनने से बाघों की सुरक्षा के लिए अलग से दस्ता तैयार हो सकेगा। उनकी सही तरीके से मॉनिटरिंग हो सकेगी।
इसलिए जरूरी है एक्शन प्लान
श्री गुप्ता ने बताया कि टाइगर प्रोटेक्शन एक्शन प्लान इसलिए जरूरी है कि समरधा रेंज का वन क्षेत्रफल 20 हजार हेक्टेयर है। इसमें राजस्व क्षेत्र का जंगल शामिल नहीं है। वन क्षेत्र में टाइगर मूवमेंट पर नजर रखने के लिए 36 लोगों का स्टॉफ बहुत कम है। वाहन भी ऐसे नहीं है कि टाइगर का पीछा कर उस पर नजर रख सके। टाइगर मॉनिटरिंग के लिए अलग से कम से कम पांच जिप्सी, मोटर साइकिल, नाइट विजन वाइनाकूलर , सर्चिंग टार्च और जरूरत पड़ने पर वन्य प्राणियों को रेस्क्यू के संसाधन उपलब्ध होना चाहिए।
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