भोपाल. राजभवन परिसर। राजधानी के हाई सिक्युरिटी जोन में से एक। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक डीएसपी सहित 95 पुलिस वाले चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। इसके बावजूद तीन चोर आराम से परिसर में घुस गए। पांच घंटे रहे। उन्होंने वहां चंदन के दो पेड़ काटे। वहीं उनके छोटे-छोटे टुकड़े किए। फिर वहां से लकड़ी निकाल भी लाए।
इस वारदात का खुलासा बारह दिन बाद तब हुआ जब यही चोर राजधानी के चार इमली इलाके में वारदात की नीयत से घूमते पकड़े गए। 5 सितंबर को हुई इस वारदात ने राजभवन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राजभवन की बाउंड्रीवाॅल का पिछला हिस्सा हिंदी ग्रंथ अकादमी के नजदीक है। चोर यहीं से रात 11 बजे रस्सी की मदद से बाउंड्रीवॉल फांदकर परिसर में दाखिल हुए थे।
एक अन्य चोर दीवार के नजदीक के नाली में पूरे समय लेटा रहा, ताकि आने-जाने वालों पर नजर रख सके। वारदात को अंजाम देने के बाद चोर सुबह चार बजे इसी रास्ते से निकल गए।
ऐसे हुआ खुलासा
एसपी साउथ अंशुमान सिंह के मुताबिक बुधवार को चार चाेरों को पकड़ा गया। उन्होंने अपने नाम सीहोर निवासी मौसम खां, भूरे खां और कासिम खां बताए। पूछताछ की तो पता चला कि वे चंदन के पेड़ चुराने की फिराक में थे। उन्होंने ही राजभवन में चोरी का खुलासा किया। तीनों ने बताया कि उन्होंने कोलार निवासी रफीक खान और छोला रोड निवासी वहीद खान के साथ मिलकर राजभवन से पेड़ चुराए थे। रफीक और वहीद को भी पुलिस ने पकड़ लिया है।
अरेरा कॉलोनी से लेकर चार इमली तक निशाने पर: बदमाशों के निशाने पर अरेरा कॉलोनी, चार इमली और 74 बंगला जैसे पॉश एरिया रहते थे। इन इलाकों में अफसर और राजनेता रहते हैं, जिनके बंगलों में चंदन के पेड़ भी लगे हैं। आरोपी बाउंड्रीवॉल से बाहर लटकी पेड़ों की टहनियों से चंदन की पहचान कर लेते थे।
आरोपियों ने बताया कि उन्होंने पिछले साल 4 दिसंबर को ई-5, चार इमली में रहने वाले वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के डायरेक्टर बीपीएस परिहार के घर से भी चंदन के पेड़ चुराए थे। इससे पहले इन्होंने भोपाल वन मंडल के कंजरवेटर एल कृष्णमूर्ति के घर से भी चंदन का एक पेड़ चुराया था।
चंदन तस्करों से हैं संबंध
एसपी के मुताबिक आरोपी खानाबदोश बेलदार मजदूर हैं। बीते 4-5 साल से ये गिरोह बनाकर ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। उनका संपर्क चंदन तस्करों से है। वे तस्करों को चंदन के पेड़ की टहनियां 2200 रुपए किलो के हिसाब से बेचते थे। जबकि तना महंगे दाम में बेचा जाता था। सीहोर में रहने वाले तस्कर चोरी की यह लकड़ी उप्र स्थित कन्नौज पहुंचा देते थे। फिलहाल पुलिस ऐसे किसी तस्कर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
हरे रंग के कपड़े पहनकर होते थे दाखिल: एसपी ने बताया कि आरोपी हरे रंग के कपड़े पहन कर देर रात वारदात को अंजाम देते थे। इससे उन्हें पेड़ों और झाड़ियों में छिपने में सहूलियत होती थी। अचानक देखने पर यह फर्क करना भी मुश्किल हो जाता था कि पेड़ की आड़ में कोई बैठा भी है या नहीं। आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि वे राजभवन को कोई आश्रम समझकर उसके परिसर में दाखिल हो गए थे।
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