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चीनी राष्ट्रपति को अपने जिस ग्वांगझू शहर पर है नाज, जानिए कैसा था वो पहले

7 वर्ष पहले
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(PIC: ग्वांगझू में डॉ. रश्मि झा)
  • भोपाल की डॉ. रश्मि झा ने अपनी मेडिकल एजुकेशन के दौरान ग्वांगझू शहर में तीन वर्ष गुजारे हैं। चीन में बिताए अपने अनुभवों पर उन्होंने एक किताब लिखी है, 'चीन के दिन'।
भोपाल। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर थे। इस दौरानमोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मौजूदगी में गुजरात और चीन के ग्वांगडोंग प्रांत को सहोदर राज्य (सिस्टर प्रोविंस) तथा उसकी राजधानी ग्वांगझू और अहमदाबाद को सहोदर शहर (सिस्टर सिटी) बनाने के करार पर दस्तखत किए गए।

चीन के आर्थिक विकास को दर्शाते ग्वांगझू शहर से सिटी की डॉ. रश्मि झा का गहरा नाता रहा है। उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ग्वांगझू यूनिवर्सिटी से चीनी चिकित्सा की पढ़ाई करने की फैलोशिप दी थी। 1995 से 1997 तीन साल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने चीन की सभ्यता संस्कृति और प्रोग्रेस पर रिसर्च की। ग्वाग्झू को उन्होंने साधारण से शहर से डेवलप सिटी में तेजी से बदलते देखा।
दस साल बाद 2007 में जब वे उस शहर पहुंचीं, तो उसका नक्शा पूरी तरह से बदला हुआ था। एयरपोर्ट हाइटेक और पचास गुना बड़ चुका था।

वे कहती हैं, चीन की महत्वाकांक्षाओं ने एक साधारण ग्वांगझू शहर को आर्थिक और वैज्ञानिक रूप से समृद्ध बना दिया। चीन में और ग्वांगझू शहर में बिताए अनुभव और दस साल के बाद ग्वांगझू के विकास की यादों को उन्होंने अपनी किताब 'चीन के दिन' में समेटा है।
याद हुई ताजा...
डॉ. रश्मि झा ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहमदाबाद को ग्वांगझू की तर्ज पर विकसित करने की बात हुई, तो सारी यादें ताजा हो गईं। वे बताती हैं, ढाई हजार किलोमीटर की यात्रा कर जब मैं वहां की यूनिवर्सिटी से चीनी चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने पहुंची थी, एयरपोर्ट से यूनिवर्सिटी तक के सफर में पूरे शहर को देखा। तीन साल में चीन और ग्वांगझू के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हुई।

ग्वांगझू के अनुभव तब और दस साल बाद
जब मैं 1995 में यूनिवर्सिटी गई तब शहर में जगह-जगह मेट्रो के लिए खुदाई चल रही थी। हर तरफ रास्ते बंद और शहर के एक सिरे से दूसरे शहर तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते थे। सिटी बसों की संख्या काफी थी। कुछ ही एयरकंडीशन बसें थीं, जो केवल खास रूट पर चलती थीं। साथ ही आबादी इतनी ज्यादा कि घंटों इंतजार करना पड़ता था।

वे बताती हैं कि, 10 साल बाद वर्ष, 2007 में जब मैं दुबारा वहां गई तो देखा कि हर बस हाइटेक और एयरकंडीशन हो चुका था। हर रूट पर बस बगैर विलंबक के मिल रही थीं। पढ़ाई के बाद 1997 में मैंने जिस एयरपोर्ट से भारत के लिए उड़ान भरी थी, 10 साल बाद वह एयरपोर्ट जादुई तरीके से 50 गुना बड़ा और एडवांस हो चुका था।

सिर्फ आठ महीने में बना दिया फ्लाईओवर
एयरपोर्ट से निकलते ही एक और आश्चर्य मेरा इंतजार कर रहा था। 45 किलोमीटर के लंबे फ्लाईओवर से मैंने पूरा शहर पार कर लिया। सिर्फ 8 महीने में इतना लंबा फ्लाई ओवर बनाकर चीन ने वर्ल्ड रिकार्ड बनाया। ची छांग लू यानी एयरपोर्ट रोड पर लंबे विशाल पेड़ों की कतारें थीं। जहां पहले एक भी पेड़ नहीं था।
मेरी चीनी मित्र ने बताया कि वैज्ञानिक और संवदेनशील तरीके से उन्होंने उन पेड़ों को रोपित किया है। विशाल होटल, मॉल्स, एडवांस कारें, न केवल ग्वांगझू बल्कि पूरे चीन ही बदल चुका था। किसी देश में साइंटिफिक एप्रोच के साथ इतनी प्रगति अपने आप में परी कथा के जैसी है। अब जब चीन और भारत की मैत्री से पहले अहमदाबाद को डेवलप करने की बात हो रही है। यह अच्छा संकेत है। आने वाले समय में देश के दूसरे शहीदों को भी चीन की डेवलप तकनीक के तर्ज पर विकसित किया जाए, तो निश्चित ही नया भारत सामने होगा।
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