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हेल्थ मिनिस्टर का बंगला घेरने पहुंचे यूथ कांग्रेसी गिरफ्तार

7 वर्ष पहले
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मप्र के सरकारी अस्पतालों में करीब 30 करोड़ रुपए की अमानक दवाएं बांटे जाने का विरोध करते हुए युवक कांग्रेस ने किया नरोत्तम मिश्रा के बंगले पर प्रदर्शन। पुलिस को करना पड़ा हल्का बल प्रयोग।

भोपाल। मप्र के सरकारी अस्पतालों में करीब 30 करोड़ रुपए की अमानक दवाएं बांटे जाने के विरोध में सोमवार को युवक कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बंगले का घेराव किया।
युवक कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मोनू सक्सेना के नेतृत्व में करीब 400 कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से रैली निकालते हुए स्वास्थ्य मंत्री के बंगले पर पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

कांग्रेसियों ने प्रदर्शन के दौरान जब बैरीकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान करीब तीन सौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
यहां मोनू सक्सेना ने कहा कि, इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री का बयान गैर जिम्मेदाराना है। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
यह है मामला...
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को 29 करोड़ 70 लाख रुपए की अमानक दवा बांट दी गईं। इसे लेकर मध्यप्रदेश के मुख्य लेखाकार ने आपत्ति के साथ चिंता जाहिर की है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है।

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2010 से 2013 के बीच में तमिलनाडु मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (टीएमएनसी) के तहत खरीदी गई अधिकतर दवाओं को बिना जांच के ही मरीजों को बांट दिया। करीब 30 करोड़ रुपए से ये दवाएं खरीदी गई थीं। दवा नीति के अनुसार दवा खरीदी के तीन दिन के भीतर हर बैच की दवा के नमूने जांच के लिए अधिकृत लैब में भेजे जाने चाहिए थे। इनमें 29 करोड़ में से 70 लाख की दवाएं अमानक भी निकली हैं। इसके बाद भी इन्हें मरीजों को बांट दिया गया।

सीएमएचओ और सिविल सर्जन स्टोर के लिए खरीदी गई इन दवाओं में से कुछ नमूने खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने लिए थे। इनमें 28 नमूने अमानक पाए गए, जबिक इनमें से आठ नमूने दवा कंपनियों द्वारा स्वयं कराए गए टेस्ट में सही बताए गए थे। एमपीएजी ने इन दवा कंपनियों की जांच पर भी सवाल उठाए हैं।

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाएं अमानक मिलने के बाद भी न तो इन दवाओं के बदले में दूसरी दवाएं ली गई और न ही उनकी राशि वसूली गई।

एमपीएजी ने ऑडिट रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं को भी अमानक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 17 दवाओं के नमूने अमानक मिले हैं। इनकी खरीदी 10 लाख रुपए से की गई थी।

यहां खरीदी गई थी दवाएं
  • सिविल सर्जन भोपाल, बालाघाट, होशंगाबाद, धार, मंडला, जबलपुर, उमरिया, इंदौर, छिंदवाड़ा, अशोकनगर, सीएच बैरागढ़ और टीबी हास्पिटल भोपाल
  • सीएमएचओ बालाघाट, श्योपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा,रीवा, होशंगाबाद, दतिया, मंडला, बड़वानी, जबलपुर, गुना और अनूपपुर।
ये दवाएं मिलीं अमानक
टैब क्वाट्रिमिक्साजोल 500 एमजी, रैनिटिडीन 150 एमजी, पैरासिटामॉल सीरप, थियोलिन ई, कैप्सूल एमाक्सी 250 एमजी, 500 एमजी, आमेप्राजोल, टैब मेट्रोजिल 400 एमजी, सीरप अलबेंडाजोल,टैब पैरासिटामॉल 500 एमजी आदि।

यह बोले थे स्वास्थ्य मंत्री
  • मैंने एमपीएजी की रिपोर्ट नहीं देखी है। मुझे नहीं लगता कि उसमें दी गई जानकारी सत्य होगी।
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