यह अनोखी मेस भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (आईआईएफएम) परिसर में स्थित है। यह इस मायने में अनूठी है, क्योंकि इसका मैनेजमेंट किसी कैटरिंग या एजेंसी के जिम्मे नहीं, बल्कि खुद स्टूडेंट्स संभालते हैं।
भोपाल। अपना घरबार छोड़कर किसी दूसरे शहर में पढ़ने आए बच्चों के लिए खान-पान एक बड़ी समस्या होती है। किसी को पौष्टिक खाना नहीं मिलता, तो कोई महंगे होटल अफोर्ड नहीं कर पाता। किसी-किसी के लिए समय पर भोजन का प्रबंध करना एक चुनौती होती है।
यह सब दिक्कतें भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट(आईआईएफएम) के स्टूडेंट्स के सामने भी थीं, लेकिन कहते हैं, जहां चाह-वहां राह। यहां के स्टूडेंट्स ने एकजुटता दिखाई और वहां की मेस का संचालन स्वयं अपने हाथों में ले लिया। इसके कई फायदे हुए। पहला-स्टूडेंट्स को समय पर ब्रेक फास्ट, लंच और डिनर मिलने लगा। दूसरा-शुद्ध और पौष्टिक भोजन के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ी। तीसरा, बाहर की अपेक्षा खाना सस्ता भी पड़ा। यही नहीं उन्हें मेस में साफ-सफाई को लेकर भी चिंतित नहीं होना पड़ा।
इस तरह चलती है मेस...
इस मेस में करीब 200 बच्चों के खाने का इंतजाम होता है। इन सबने मिलकर एक मेस कमेटी बनाई है, जिसमें 10 सदस्य हैं। यहां के स्टूडेंट्स विजय और रश्मि बताते हैं, मेस के मैनेजमेंट के लिए हमने 2 कुक और तीन अन्य लोग रखे हुए हैं।
मेस कमेटी हफ्ते के पहले दिन सातों दिनों का मील चार्ट तय कर देती है कि, किस दिन क्या बनेगा। इस लिस्ट को बाहर चिपका दिया जाता है।
खाना सस्ता और पौष्टिक...
बच्चों ने जबसे इस मेस का प्रबंधन अपने हाथ में लिया है, तब से उन्हें पौष्टिक और सस्ता खाना मिलने लगा है। सातों दिनों का अलग-अलग मेनू होता है। वहीं, खाने की चीजों में भी बदलाव होता है। यानी रोज अलग-अलग किस्म की डिसेज परोसी जाती हैं।
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