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यह दिल्ली का चिडि़याघर नहीं, बल्कि मप्र का एक शहर है!

7 वर्ष पहले
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दिल्ली के चिडि़याघर में डेंजर जोन में घुसे मकसूद नामक एक युवक को बाघ ने मार डाला। लेकिन इन तस्वीरों को देखकर आप क्या कहेंगे? इस शहर में जगह-जगह ऐसे डेंजर जोन हैं। यहां शेर तो नहीं, लेकिन खतरनाक मगरमच्छ आये दिन घरों में घुस जाते हैं।

भोपाल। यह किसी चिडि़याघर का नजारा नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश का एक शहर शिवपुरी है। यहां बड़ी संख्या में मगरमच्छ आये-दिन लोगों के घरों में घुस जाते हैं। खतरा बराबर बना रहता है। यहां पिछले चार साल साल में रिकॉर्ड 51 मगरमच्छ पकड़े गए।

घरों में घुस जाते हैं...
शिवपुरी शहर में मगरमच्छ चांदपाठा एवं सिंध के अलावा शहर के नालों में स्वच्छंद विचरण करके रिहायशी इलाकों में निकल आते हैं। चार साल के अंदर शिवपुरी में रिकार्ड 51 मगरमच्छ को पकड़ा गया। यहां के चांदपाठा में मगरमच्छों की संख्या अधिक होने से ईको सिस्टम बिगड़ने लगा है, जिसके चलते दो साल से शहर में पकड़े जाने वाले मगरमच्छों को अमोला सिंध नदी में छोड़ा जा रहा है। बारिश के दिनों में शहर के रिहायशी इलाकों में मगरमच्छों का विचरण आम बात हो गई है।

51 मगरमच्छ का बना रिकार्ड:
रेस्क्यू टीम प्रभारी डॉ. जितेंद्र जाटव का दावा है कि देश में शिवपुरी पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां चार वर्ष में 51 से अधिक मगरमच्छ पकड़े गए। डॉ. जाटव का कहना है कि हर मगरमच्छ खतरनाक होता है।

चांदपाठा में बढ़ गई तादाद:
नेशनल पार्क के अंदर स्थित चांदपाठा जलाशय में किसी भी समय मगरमच्छ आसानी से देखे जा सकते हैं। क्योंकि इसमें मगरमच्छों की संख्या हजार के ऊपर जा पहुंची है। यही वजह है कि पिछले दो साल में जितने भी मगरमच्छ शहर में पकड़े गए, उन्हें अमोला घाट पर सिंध नदी में छोड़ा गया। ताकि मगरमच्छों को खुला क्षेत्र मिलने के साथ ही उसे भोजन भी पर्याप्त मिल सकेगा।

देखें कुछ पुरानी तस्वीरें..
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