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अमानक दवाओं का मामला : जेपी अस्पताल घेरने पहुंचे यूथ कांग्रेसियों और पुलिस में झड़प

7 वर्ष पहले
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(PIC: जेपी अस्पताल को घेरने पहुंचे युवक कांग्रेसियों और पुलिस में हुई झड़प)
युवक कांग्रेस ने किया सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं की खरीदी के विरोध में बुधवार को जेपी अस्पताल का घेराव किया। इस दौरान आंदोलनकारियों को खदेड़ने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

भोपाल। सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाओं की खरीदी की जांच की मांग को लेकर युवक कांग्रेस ने तीसरे दिन भी आंदोलन किया। बुधवार को युवक कांग्रेस ने जेपी अस्पताल का घेराव कर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। यहां अस्पताल की अधीक्षक डॉ. वीणा सिन्हा को एक ज्ञापन सौंपा गया। डॉ. सिन्हा ने बताया कि, एक दवा का यहां वितरण बंद कर दिया गया है। बाकी पर भी विचार किया जा रहा है।

मंगलवार को स्वास्थ्य आयुक्त का किया था घेराव...
मंगलवार को जिला युवक कांग्रेस ने सतपुड़ा भवन स्थित स्वास्थ्य आयुक्त का घेराव किया था। दर्जनों कार्यकर्ता दोपहर को सतपुड़ा भवन पहुंचे थे और प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस की समझाइश पर 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य आयुक्त पंकज अग्रवाल से मुलाकात की। लेकिन जब उन्होंने कार्यकर्ताओं के सवालों के ठीक से जवाब नहीं दिए, तो स्थिति बिगड़ गई। कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठने लगे। बाद में आयुक्त ने उनके ज्ञापन पर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

जिला युवक कांग्रेस उपाध्यक्ष मोनू सक्सेना के मुताबिक, स्वास्थ्य आयुक्त के तर्क सही नहीं थे। वे इस मामले को वर्ष, 2011 का बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि यह मामला वर्ष, 2010 से 13 के बीच का है। आयुक्त के जवाब से नाराज होकर बुधवार को युवक कांग्रेस ने जेपी अस्पताल का घेराव किया।
सोमवार को हेल्थ मिनिस्टर का बंगला घेरा था...
इस मामले को लेकर सोमवार को युवक कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बंगले का घेराव किया था। युवक कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष मोनू सक्सेना के नेतृत्व में करीब 400 कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से रैली निकालते हुए स्वास्थ्य मंत्री के बंगले पर पहुंचे थे।

यह है मामला...
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को 70 लाख रुपए की अमानक दवा बांट दी गईं। इसे लेकर मध्यप्रदेश के मुख्य लेखाकार ने आपत्ति के साथ चिंता जाहिर की है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है।

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2010 से 2013 के बीच में तमिलनाडु मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन (टीएमएनसी) के तहत खरीदी गई अधिकतर दवाओं को बिना जांच के ही मरीजों को बांट दिया। करीब 29 करोड़ रुपए से ये दवाएं खरीदी गई थीं। दवा नीति के अनुसार दवा खरीदी के तीन दिन के भीतर हर बैच की दवा के नमूने जांच के लिए अधिकृत लैब में भेजे जाने चाहिए थे। इनमें 29 करोड़ में से 70 लाख की दवाएं अमानक भी निकली हैं। इसके बाद भी इन्हें मरीजों को बांट दिया गया।

सीएमएचो और सिविल सर्जन स्टोर के लिए खरीदी गईं इन दवाओं में से कुछ नमूने खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने लिए थे। इनमें 28 नमूने अमानक पाए गए, जबिक इनमें से आठ नमूने दवा कंपनियों द्वारा स्वयं कराए गए टेस्ट में सही बताए गए थे। एमपीएजी ने इन दवा कंपनियों की जांच पर भी सवाल उठाए हैं।

अॉडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाएं अमानक मिलने के बाद भी न तो इन दवाओं के बदले में दूसरी दवाएं ली गई और न ही उनकी राशि वसूली गई।

एमपीएजी ने आॅडिट रिपोर्ट में स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं को भी अमानक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 17 दवाओं के नमूने अमानक मिले हैं। इनकी खरीदी 10 लाख रुपए से की गई थी।

यहां खरीदी गई थी दवाएं
  1. सिविल सर्जन भोपाल, बालाघाट, होशंगाबाद, धार, मंडला, जबलपुर, उमरिया, इंदौर, छिंदवाड़ा, अशोकनगर, सीएच बैरागढ़ और टीबी हास्पिटल भोपाल
  2. सीएमएच– बालाघाट, श्योपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा,रीवा, होशंगाबाद, दतिया, मंडला, बड़वानी, जबलपुर, गुना और अनूपपुर।
ये दवाएं मिलीं अमानक
टैब क्वाट्रिमिक्साजोल 500 एमजी, रैनिटिडीन 150 एमजी, पैरासिटामॉल सीरप, थियोलिन ई, कैप्सूल एमाक्सी 250 एमजी, 500 एमजी, आमेप्राजोल, टैब मेट्रोजिल 400 एमजी, सीरप अलबेंडाजोल,टैब पैरासिटामॉल 500 एमजी आदि।

यह बोले थे स्वास्थ्य मंत्री
मैंने एमपीएजी की रिपोर्ट नहीं देखी है। मुझे नहीं लगता कि उसमें दी गई जानकारी सत्य होगी।
नरोत्तम मिश्रा, स्वास्थ्य मंत्री
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