भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रांतव्यापी कृषि महोत्सव का आगाज गुरुवार को सातवें राष्ट्रीय बीज सम्मेलन के दौरान हुआ। मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन में देश के कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि ऐसे बीज विकसित करें, जिनसे जलवायु के परिवर्तित होते माहौल में उत्पादकता प्रभावित नहीं हो। ऐसे बीज जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी टिक सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कम समय में फसल देने वाले बीज तैयार करने की जरूरत है। उत्पादन में वृद्धि हुई है पर खेती में प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है। इसी के साथ कोदो-कुटकी, रागा, बासमती, शरबती गेहूं जैसी परंपरागत किस्में भी सुरक्षित रहें, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, इस पर शोध करें। श्री चौहान ने कहा कि आज प्रदेश में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ा है। प्रदेश की कृषि विकास दर में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इसके पीछे खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयास हैं। प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाया गया, किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया गया, खेती के नये तरीके बताए गए, फसल चक्र परिवर्तन किया गया।
उन्होंने कहा कि अभी भी कृषि में बीज प्रतिस्थापन कर 20 प्रतिशत उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। फूलों-फलों, औषधियों, मसालों की खेती को बढ़ाया जा सकता है। सत्र के अध्यक्ष कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि कृषि उत्पादन में क्रांति के लिये बीज का बड़ा महत्व है। उन्नत किस्म के बीजों से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में लगातार तीसरे वर्ष कृषि विकास दर में वृद्धि हुई है। प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उन्नत बीज से मक्के का उत्पादन बढ़ा है।
मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने कहा कि प्रदेश में दस वर्ष में कृषि उत्पादन दोगुना हो गया है। देश की छह प्रतिशत जनसंख्या प्रदेश में है, जबकि देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का १२ प्रतिशत प्रदेश में होता है। दलहन तथा तिलहन उत्पादन में पहले तथा गेहूं उत्पादन में प्रदेश दूसरे स्थान पर है। प्रमाणित बीजों के उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। देश में उत्पादित ३५० लाख टन प्रामाणिक बीजों में से ५२ लाख टन मध्यप्रदेश में होता है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में स्मारिका का विमोचन किया। आरंभ में स्वागत भाषण प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने किया। कार्यक्रम की जानकारी राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम के प्रबंध संचालक आरके गुप्ता ने दी। कार्यक्रम में राज्य बीज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष मधुकर हर्णे, भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव कृषि अविनाश श्रीवास्तव, प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त आरके स्वाई, केन्द्रीय बीज शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक डॉ. आरके त्रिवेदी सहित कृषि वैज्ञानिक और उन्नत कृषक तथा कृषि विश्वविद्यालय के छात्र उपस्थित थे।
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