मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने मंगलवार को सामूहिक अवकाश आंदोलन का ऐलान किया था। इसे कई कर्मचारी संगठनों का सहयोग नहीं मिलने से सरकारी काम पर आंशिक असर ही पड़ा।
भोपाल। मंगलवार को मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के सामूहिक अवकाश के आह्वान पर प्रदेश सरकार के करीब एक चौथाई कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे। हालांकि संघ ने दावा किया था कि प्रदेशभर में कई विभागों के कर्मचारी आंदोलन में शामिल होकर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। लेकिन कई संगठनों का समर्थन नहीं मिलने से यह आंदोलन प्रभावी असर नहीं छोड़ पाया। कुछेक दफ्तरों में जरूर उपस्थित कम रही।
यह हैं मांगें..
संघ के प्रांताध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने बताया कि ग्रेड पे बढ़ाने, सात फीसदी महंगाई भत्ता देने, तीसरा समयमान वेतनमान 10, 20 और 28 साल की सेवा में दिए जाने समेत 20 सूत्रीय मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश का ऐलान किया गया था।
यहां नहीं दिखा असर : मंत्रालय में कुछेक कर्मचारी नेताओं को छोड़कर ज्यादातर कर्मचारी काम पर पहुंचे।
यहां दिखा आंशिक असर: सतपुड़ा, विंध्याचल, अमरकंटक, अरेरा हिल्स और सेकंड स्टाप स्थित नर्मदा भवन, राज्य शिक्षा केंद्र, लोक शिक्षण संचालनालय।
इससे पहले...
मंत्रालय के सामने किया प्रदर्शन
मप्र स्वास्थ्य कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने सोमवार को मंत्रालय के सामने प्रदर्शन किया था। प्रदेशाध्यक्ष एसएस कौरव ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैस को ज्ञापन सौंपा गया। मप्र स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष एसबी सिंह ने बताया कि मांगें नहीं मानी गई तो 13 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
फैक्ट फाइल
- मप्र में सरकारी कर्मचारी: 4,26538
- मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ:20
- गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ: 52
(गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ ने सामूहिक अवकाश में सहयोग नहीं किया।)