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नौकर निकल सकते हैं, दगाबाज रे, इसलिए रखें इन बातों का ध्यान

7 वर्ष पहले
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(DEMO PIC)
भोपाल। घरेलू नौकर पर आंखमूंदकर भरोसा करना आपकी जान-माल दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। भोपाल में पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई केस सामने आए हैं, जिनमें नौकर ही मालिक के लिए खतरनाक साबित हुए हैं।

एक मामला:
वैशाली नगर के मकान नंबर 53 में रहने वाले 51 वर्षीय जॉन जैकब की गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्टरी है। एएसआई राजेंद्र गुर्जर के मुताबिक रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे वह परिवार समेत प्रार्थना के लिए चर्च चले गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने नौकर राजन थापा को घर पर ही छोड़ा था। रात 12 बजे लौटे तो दरवाजा खुला हुआ था और राजन भी नहीं था। अंदर जाने पर पता चला कि अलमारी में रखे दो लाख रुपए नगद, साढ़े छह तोला सोने के जेवर और एवीएटर स्कूटर गायब था।

दूसरा मामला:
नवंबर के आखिरी दिनों की बात है, ओल्ड मिनाल रेसिडेंसी में रहने वाले 65 वर्षीय एके चौधरी को घरेलू नौकर पर आंख मूंदकर भरोसा करना भेल के रिटायर्ड स्टोरकीपर को भारी पड़ गया। नौकर ने मालिक के एटीएम का इस्तेमाल कर उनके बैंक अकाउंट से करीब आठ लाख रुपए निकाल लिए। मालिक को एसएमएस अलर्ट से इस ट्रांजेक्शन की सूचना तक नहीं मिल सकी।

राजधानी में ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जिसमें नौकरों ने मालिक के घर अपराध को अंजाम दिया या किरायेदार बनकर आए बदमाश जुर्म करके गायब हो गए। ऐसे मामलों में बाद में मकान मालिक को पुलिस-कोर्ट के चक्कर काटने पड़े। इसलिए यह जरूरी है कि आप नौकर या किरायेदार रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन अवश्य कराएं। ऐसा न करने पर आपके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
उदाहरण, पिछले साल के कुछ मामले...
  • बागसेवनिया पुलिस ने तीन मकान मालिकों साकेत नगर निवासी राजेश शर्मा (46), शंकराचार्य नगर निवासी बीपी मेहरा (62) और संत आशाराम नगर निवासी रौनक सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए थे। उन्होंने अपने यहां रहने वाले किरायदारों की जानकारी पुलिस को नहीं दी थी।
  • सूखी सेवनिया में 2 और टीला जमालपुरा पुलिस ने एक मकान मालिक के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। नतीजा 24 घंटे के अंदर 1,000 मकान मालिक फार्म लेने थाने पहुंच गए।
  • अशोका गार्डन पुलिस ने बालाजी ब्वॉयज हॉस्टल संचालक इमरत सिंह ठाकुर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। उन्होंने हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की जानकारी पुलिस को मुहैया नहीं कराई थी।
तीन साल में तीन लाख में से सिर्फ 20-25 हजार किरायेदारों और नौकरों का वेरिफिकेशन...

यह लापरवाही का नमूना है कि भोपाल पुलिस को पिछले तीन सालों में 20-25 हजार किरायदारों और नौकरों की जानकारी ही मुहैया कराई गई। यह जानकारी भी पुलिस को वर्ष 2011 से 2013 बीच में विधानसभा चुनाव के दौरान चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्राप्त हुई।
यह है नियम
भोपाल डीआईजी डी. श्रीनिवास वर्मा कहते हैं, नक्सली और सिमी आतंकियों के राजधानी में किराये से रहने का खुलासा होने के बाद कलेक्टर ने धारा 144 के तहत सभी मकान मालिकों को उनके यहां रहने वाले किरायदारों की जानकारी संबंधित पुलिस थाने में देना अनिवार्य कर दिया। ऐसा न करने पर धारा 144 के उल्ल्घंन में पुलिस मकान मालिकों के खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई करती है। हालांकि इसमें भी पुलिस सिर्फ आचार संहिता लागू होने या कलेक्टर के आदेश पर ही कार्रवाई कर सकती है।

सजा व जुर्माना दोनों का प्रावधान
मकान मालिकों और नौकरों की जानकारी पुलिस को नहीं देना एक गैर जमानती अपराध है। इसमें गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोर्ट से ही जमानत मिलती है। आरोप तय होने पर कैद और जुर्माना की सजा का भी प्रावधान है।

पुलिस की कार्रवाई...
वर्ष 2011 में किरायदारों और नौकरों के वेरिफिकेशन को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। नवंबर, 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने किरायदारों और नौकरों की जानकारी पुलिस थाने में उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया था।

अंदर पढ़ें फार्म कहां से प्राप्त करें और पुलिस की सलाह के अलावा और अन्य जानकारियां...
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