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क्लाइमेट चेंज इफेक्ट, आठ दिन लेट हो गया है भोपाल का मानसून

7 वर्ष पहले
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भोपाल।
भोपाल सहित मप्र के चारों महानगरों में मानसून के आमद की तारीख अब आगे खिसक गई है। इसका मतलब है कि मानसून तय समय से आठ दिन लेट आ रहा है। पहले भोपाल में मानसून आने का वक्त १३ जून था लेकिन अब यह बढ़कर २१ जून हो गया है। मौसम विभाग गर्म गैसों के उत्सर्जन, औद्योगिकरण की वजह से बढ़ रहे तापमान से हो रहे जलवायु परिवर्तन को इसका कारण बता रहा है।
मौसम विभाग द्वारा बुधवार को आयोजित एक कार्यशाला में मौसम विज्ञान केंद्र के डायरेक्टर डाॅ. अनुपम कश्यपी ने बताया कि केंद्र ने पिछले ५४ सालों के मानसून के आगमन के डाटा के आधार पर एक स्टडी की है। स्टडी का निचोड़ यह है कि भोपाल में मानसून के आने की तारीख आठ दिन और इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर में सात दिन आगे बढ़ गई है। इस विश्लेषण के बाद जल्द ही मौसम विभाग अधिकारिक रूप से नई तारीखों की घोषणा कर देगा। सिर्फ आने की ही नहीं मानसून के रवाना होने की तारीख भी चार दिन आगे बढ़ी है।
डॉ. कश्यपी ने बताया कि ईंधन जलने से निकलने वाली गैसें, औद्योगिकरण और जंगल कटने के कारण कार्बन डाय अाक्साइड, मीथेन, नाइट्रस आक्साइड जैसी गैसें निकल रही है, इससे तापमान में इजाफा हो रहा है आैर तापमान बढ़ने के कारण ही मानसून लेट हो गया है।
अगली स्लाइड में जानें, मानसून आने और जाने की क्या हो गई है तारीखें...
कश्यपी ने बताया कि भोपाल का मानसून पहले १३ जून को आता था लेकिन अब इसके आने का समय २१ जून हो गया है। ऐसे ही मानसून जाने का समय पहले २८ सितंबर तय था लेकिन अब ३ अक्टूबर तक इसकी रवानगी होती है। इसी तरक इंदौर में मानसून आने की तारीख १३ जून से बदलकर २० जून, जाने की तारीख २७ सितंबर से बदलकर ३ अक्टूबर हो गई है। ग्वालियर में मानसून १८ जून की जगह अब २६ को आता है और २२ सितंबर की जगह ३० सितंबर को जाता है। जबलपुर में १२ जून की बजाय २० जून को मानसून आता है और २ अक्टूबर की जगह ६ अक्टूबर को जाता है।

अगली स्लाइड में जानिए, कितना बढ़ा तापमान
कश्यपी ने बताया कि पिछले २४ सालों के तापमान का अध्ययन करने से यह पता चला है कि अगस्त महीने में भोपाल का औसत अधिकतम तापमान ०.०५५ डिग्री बढ़ गया है। वहीं अगस्त में ६.५९६ मिमी प्रति वर्ष बारिश कम होने लगी है। साथ ही सितंबर में शहर का औसत न्यूनतम तापमान भी ०.०७५ डिग्री बढ़ गया है।