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कटा कान बचाए जान

7 वर्ष पहले
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(PIC: राजधानी में अब तक करीब 13 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन किया जा चुका है।)
रात-बेरात जब आप रास्ते से गुजरते हैं, तो हमेशा यह डर बना रहता है कि; पता नहीं कब कोई कुत्ता आकर आपका पैर पकड़ ले! लेकिन उम्मीद जागी है कि आने वाले 3-4 वर्षों में मप्र की राजधानी कुत्तों के भय से मुक्त हो जाएगी; वो भी कुत्तों को मारे बगैर। जानिए कैसे...

भोपाल। करीब तीन साल पहले राजधानी को कुत्तों के भय से छुटकारा दिलाने नगर निगम ने उन्हें जहर देकर मारने की मुहिम छेड़ी थी। लेकिन एनिमल राइट एक्टिविस्ट(पशु-अधिकारवादी) खासकर मेनका गांधी के विरोध के चलते उसे रोक दिया गया। हालांकि अब फिर लोगों को कुत्तों के आक्रमण से बचाने नगर निगम ने मुहिम शुरू की है, लेकिन अब जहर का इस्तेमाल नहीं हो रहा। नसबंदी और वैक्सीनेशन के जरिये कुत्तों के उग्र बर्ताव और आबादी पर काबू करने की कोशिश शुरू हुई है। भोपाल में इस समय लगभग 1 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते होंगे, जिनमें से 13 हजार की नसबंदी और वैैक्सीनेशन किया जा चुका है।
ऐसी उम्मीद जताई गई है कि, अगले तीन वर्षों के भीतर भोपाल में कुत्तों की आबादी स्थिर हो जाएगी। इसके साथ ही वैक्सीनेशन के कारण उनकी आक्रमकता काबू में आ जाएगी। यानी अगर आपको कहीं किसी कुत्ते का कान कटा दिखे, तो समझ लीजिए कि उसका वैक्सीनेशन हो चुका है। इसका मतलब यह हुआ कि, ऐसे कुत्तों का बर्ताव आक्रमक नहीं होता। जाने-अनजाने अगर ऐसे कुत्ते काट भी लेते हैं, तो उनसे रैबीज का खतरा नहीं होता। रैबीज एक जानलेवा बीमारी है।
भोपाल में हैं 1 लाख कुत्ते
ऐसा माना जाता है कि हर 22 से 25 लोगों पर एक कुत्ता होता है। भोपाल की आबादी 20 लाख है, तो इस हिसाब से शहर में 1 लाख कुत्ते हैं, जिनकी नसबंदी समयबद्ध तरीके से की जानी है।
कैसे होती है नसबंदी और वैक्सीनेशन
  • कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन के चार चरण होते हैं। सबसे पहले कुत्तों को पकड़ा जाता है। इसके लिए भोपाल नगर निगम की गाडी़ उन जगहों पर जाती है, जहां से कुत्तों को पकड़ना होता है। इसके लिए टीम रोजाना सुबह 5.30 से 7.30 बजे तक विजिट करती है। इसके लिए एक बटरफ्लाई नेट का उपयोग किया जाता है। अभी रोजाना 40 के करीब कुत्ते पकडे़ जा रहे हैं, जिनकी संख्या बढ़कर जनवरी से 100 हो जाएगी।
  • कुत्तों को पकड़ने के बाद न्यूटर(नपुंसक) की प्रक्रिया की जाती है। यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें कुत्तों को हल्की बेहोशी का इंजेक्शन देते हैं। बेहोश करने के बाद उसके ऑपरेशन की तैयारी की जाती है। ऑपरेशन के दौरान मेल डॉग के दोनों टेस्टिकल(अंडकोष) निकाल लिए जाते हैं। वहीं फीमेल डॉग की ओवरी और यूटेरस निकाल ली जाती है। बाद में इन्हें फार्मीलिन में प्रिजर्व कर दिया जाता है। इन्हीं की संख्या के आधार पर तय होता है कि कितने कुत्तों की नसबंदी हो गई है। इस प्रक्रिया में 10 से 15 मिनट लगते हैं।
  • कुत्तों की नसबंदी के बाद उन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन से वैक्सीनेट किया जाता है। वैक्सीन की शीशी 400 रुपए की आती है, जिससे 10 डॉग को वैक्सीनेट किया जाता है।
  • नसबंदी और वैक्सीनेट करने के बाद उन्हें 5 दिन तक सेंटर पर रखा जाता है। उनके घाव ठीक होने के बाद उसी जगह छोड़ा जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
3 साल में थम जाएगी कुत्तों की आबादी
अभी तक भोपाल में एक सेंटर चल रहा था, लेकिन जनवरी से 4 सेंटर खुल जाएंगे। इससे साल में करीब 23 हजार कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन होगा, जिससे 3 साल में कुत्तों की आबादी स्टेबल जो जाएगी।
एसके श्रीवास्तव, वेटनरी आफीसर, नगरपालिक निगम
क्या कहता है वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन का सर्वे
डब्ल्यूएचओ के सर्वे के अनुसार भारत में हर साल 20 हजार लोग रैबीज से मरते हैं। पूरे भारत में 25 मिलियन डॉग हैं और हर 2 सेकेंड में 1 डॉग बाइट का केस होता है। भारत में हर 30 मिनिट में एक मौत रैबीज से होती है।
वैक्सीनेशन पर प्रति कुत्ता खर्च
(नया रेट)
  1. मेल डॉग-590 रुपए।
  2. फीमेल डॉग-690 रुपए।
अभी तक, जो आता था खर्चा
  1. मेल डॉग-545 रुपए।
  2. फीमेल डॉग-622 रुपए।
अंदर पढ़िए विस्तार से कैसे होती है नसबंदी और वैक्सीनेशन