(PIC: तानसेन की मढ़िया पर शिवनारायण नाथ से ध्रुपद सीखते बच्चे)
भोपाल। ग्वालियर से करीब 55 किलोमीटर दूर है बेहट गांव। इसी छोटे से गांव में जन्मे थे अकबर के नौ रत्नों में से एक मियां तानसेन। एक बार तानसेन ने ऐसे सुर छेड़े कि; यह मढ़िया उनकी ओर झुक गई थी।
दरअसल, राजा मान सिंह की संगीत शाला से जब तानसेन जब अपने गांव लौटे, तो झिलमिलेश्वर महादेव की इसी मढ़िया के चरणों में रियाज करने लगे। साधना के दौरान एक बार कुछ ऐसे सुर लगे कि मढ़ी तिरछी हो कर तानसेन की ओर झुक गई। वह आज भी झुकी हुई है।
अब शिव भगवान की इसी मढ़िया के बूढ़े बरगद की छांव में कमलेश, विशाल और अनिकेत जैसे बच्चे संगीत का वरदान हासिल करने की साधना में जुटे हैं। यानी अब यहां एक साथ कई रत्न तैयार हो रहे हैं। इन छोटे ध्रुपद गायकों काे तानसेन समारोह में गाने का मौका मिला है। ये बच्चे 15 दिसंबर को देश भर के संगीत उस्तादों के सामने बेहट की मजलिस में अपनी प्रस्तुति देंगे।
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