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दो गुटों में हिंसा के बाद घर हुए सूने, पुलिस के साये में बस्ती

7 वर्ष पहले
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(PIC:उपद्रवियों ने इस तरह जला दिए थे घर।)
करोंद में दो गुटों में दो दिनों तक रुक-रुककर चले खूनी संघर्ष के बाद शुक्रवार को मातम-सा पसरा हुआ है। पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। इस मामले को एक लेकर एक गुट सुबह गृहमंत्री बाबूलाल गौर से मिला। उधर, आगजनी के बाद एक महीने के बच्चे की मौत हाे गई। बताया जाता है कि दम घुटने के कारण उसकी मौत हुई है।

भोपाल। करोंद इलाके में एक सम्प्रदाय विशेष के दो गुटों के बीच बुधवार से जारी विवाद गुरुवार को फिर हिंसक हो गया था। बड़ी संख्या में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उपद्रवियों ने एक-दूसरे के घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटा और घरों-दुकानों में आग लगा दी थी। उपद्रवियों को जहां; जो वाहन दिखे, उन्हें भी फूंक डाला।
शुक्रवार का हाल...
हालांकि इस अमन नाम की कॉलोनी में अब सन्नाटा खिंचा हुआ है। प्रशासन ने डरे-सहमे लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। आगजनी की चपेट में आए घरों में अब सन्नाटा पसरा हुआ है। बस्ती में पुलिस गश्त कर रही है।
उधर, हमले की चपेट में हुए कुछ लोगाें ने गृहमंत्री बाबूलाल गौर के बंगले पर जाकर उनसे मुलाकात की। गृहमंत्री ने इस मामले में दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया है।

महिलाओं और बच्चों को किया शिफ्ट
इलाके में फैले तनाव के चलते पुलिस प्रशासन महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। उधर, एक गुट का कहना है कि वे काफी डरे हुए हैं और अब यहां नहीं रहना चाहते। दोबारा हमले की आशंका के चलते डरे हुए लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घर जाने को मजबूर हैं।

यह है मामला :
करोंद में सम्प्रदाय विशेष के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं। यहां दो गुटों में धार्मिक स्थल और उससे सटी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। बुधवार को दोनों गुट एक-दूसरे के सामने आ गए और देखते ही देखते हिंसा पर उतर आए। तनाव को देखते हुए वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, बावजूद गुरुवार को फिर दोनों गुट उपद्रव करने लगे। एक-दूसरे को आंख दिखाने के बाद तू-तू-मैं-मैं से शुरू हुआ झगड़ा हिंसक हो उठा।

एक गुट के लोगों ने दूसरे गुट के घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों गुट लाठियां और पत्थर लेकर एक-दूृसरे से भिड़ गए।
उपद्रवियों ने घरों और गाड़ियों में आग लगा दी। उपद्रवियों को खदेड़ने पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। अश्रु गैस भी छोड़ी गई।

30-40 आंसू गैस के गोले छोड़े गए
गुरुवार सुबह एक पक्ष ने दूसरे पक्ष की महिलाओं-बच्चों के साथ जब मारपीट की, तो दूसरे पक्ष के लोगों ने आधा उनके मकानों-दुकानों में आग लगा दी। इस बीच दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों को नियंत्रण में करने के लिए लगभग 30-40 आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे भी उपद्रवी नहीं माने, फिर पुलिस ने हालात को काबू में करने के लिए हवाई फायर भी किए।

दमकल को नहीं आने दिया अंदर
दुकानों एवं मकानों में लगी आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड पर भी लोगों ने पथराव कर दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे हुए हैं।

इलाके में है कर्फ्यू सा माहौल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना स्थल के आस-पास खासतौर पर करोंद की हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी के समीप कर्फ्यू सा माहौल है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति न बने, इसलिए लोगों को वहां से गुजरने से भी रोका जा रहा है।
दोनों पक्षों पर केस
बुधवार रात दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। दोनों पक्षों के लोगों ने वाहनों में तोड़फोड़ के साथ एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की थी। पुलिस ने दोनों पक्षों के करीब एक-एक दर्जन युवकों पर बलवा, मारपीट का मामला देर रात ही दर्ज कर लिया था।
पुलिस रात में ही एक्शन लेती तो नहीं होता उपद्रव
ईरानियों व सुन्नियों के खूनी संघर्ष में राजधानी पुलिस का रवैया फिर लचर साबित हुआ है। यदि बुधवार रात को हुए संघर्ष के बाद ही पुलिस सतर्क हो जाती तो शायद कई घर उजड़ने से बच जाते। पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक कि उसका खुफिया तंत्र भी पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।
बुधवार को रात में वहां कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात तो थे, लेकिन उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी कि सुन्नी समुदाय के लोग ईरानियों पर हमले की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस की इसी सुस्ती का लाभ उठाकर उपद्रवी एक-एक कर जुटते गए और 500 लोगों की भीड़ गुरुवार सुबह 9 बजे डंडे व तलवार लेकर सड़कों पर उतर आई। उसी कॉलोनी में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों ने कॉलोनी की घेराबंदी की और फिर घरों में आग लगा दी।
सबकुछ उजड़ा, अब वहां कैंप करेगा प्रशासन
करीब तीन दर्जन घर उजड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन जागे। अधिकारियों ने घटनास्थल के पास कैंप कर लिया है। यहां पूरे इलाके में हैलोजन की रोशनी की गई है। क्यूआईटी और आरएएफ के अलावा जिला पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर जमे हुए हैं।
...और बचाव की मुद्रा में आए अफसर
यह सही है कि उस वक्त इलाके में पुलिस बल तैनात था लेकिन उपद्रवियों ने संगठित होकर वारदात को अंजाम दिया। यदि पुलिसकर्मी वहां नहीं होते तो हालात और खराब हो सकते थे। पुलिस ने उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े। उपद्रवियों की संख्या के अनुपात में सरकारी अमला कम था। इसलिए हालात बिगड़े।
निशांत वरवड़े, कलेक्टर
पुलिस के मुकाबले उपद्रवी बहुत ज्यादा थे। विवाद दोबारा शुरू होने का पता चलते ही फोर्स पहुंच गया और हालात काबू में आ गए। हमने कम समय में अच्छा रिएक्शन दिया है। चूक तो हुई ही नहीं। उपद्रवियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
डी. श्रीनिवास वर्मा, डीआईजी
फोटो : गगन नायर।
अंदर देखें उपद्रव के बाद शुक्रवार को कैसा था माहौल...