(PIC: शनिवार सुबह 6.30 बजे हमारे पाठक अनिल गुलाटी ने खींची शाहपुरा लेक की फोटो।)
भोपाल। पश्चिमी विक्षोभ(हवाओं के रुख) की वजह से 4 साल बाद दिसंबर में आए मावठे ने शहर की फिजा में ठंडक घोल दी है। आधा दिसंबर बीतने के बाद भी कड़ाके की ठंड का इंतजार कर रहे शहरवासियों को अगले एक-दो दिन में रात में और सुबह-सुबह जबर्दस्त ठंड का सामना करना पड़ सकता है। एक दिन बाद रात का पारा 10 डिग्री के नीचे जाने की संभावना भी है।
माैसम केंद्र का अनुमान
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. अनुपम कश्यपी के मुताबिक, शनिवार को भी शहर में नमी बनी हुई है, इस वजह से शनिवार शाम तक भोपाल के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। उन्होंने बताया कि रविवार से मौसम खुलेगा और उत्तरी हवाओं का असर शुरू हो जाएगा। इससे न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे जा सकता है। हालांकि सूरज निकलने की वजह से दिन का तापमान बढ़कर 26 से 27 डिग्री पर पहुंच सकता है। हालांकि बारिश के बाद शनिवार सुबह से ही जोरदार ठंड की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन बादलों की वजह से न्यूनतम तापमान ज्यादा गिर नहीं सका। शनिवार को न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से पांच डिग्री ज्यादा है।
कश्यपी ने बताया कि उत्तर-पश्चिम मध्यप्रदेश में ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है, इसी नमी की वजह से प्रदेश में बारिश का दौर चल रहा है। पूर्वी मप्र में शनिवार को भी कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है।
पांच सालों में दिसंबर में सबसे ज्यादा बारिश
पिछले पांच सालों में दिसंबर में इस साल सबसे ज्यादा बारिश हुई है। पिछले तीन साल तो दिसंबर सूखा ही रहा। इससे पहले 2010 में 24 घंटे में 3.5 मिमी पानी गिरा था। शनिवार सुबह 8.30 बजे तक भोपाल में 19.5 मिमी बारिश हुई है।
ठंड में सेहत का ऐसे रखें ख्याल...
मावठा पड़ने के बाद अब अचानक तापमान गिरने की संभावना बढ़ गई है। तापमान में अचानक भारी फेरबदल होने की वजह से शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है और बीमारियां शुरू हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे और बुजुर्गों को यह मौसम अपनी गिरफ्त में ले लेता है, जिससे थ्रोट इंफेक्शन, निमोनिया सहित अन्य बीमारियां शुरू हो जाती हैं। डॉ. दीपक चतुर्वेदी आपको बता रहे हैं कि इस मौसम में स्वस्थ्य कैसे रह सकते हैं?
बच्चों और बुजुर्गों पर क्या पड़ता है असर?
- बारिश के बाद तापमान अचानक गिरने से बच्चों को थ्रोट इंफेक्शन और निमोनिया जैसी बीमारी होती हैं। बार-बार थ्रोट इंफेक्शन का असर दिल पर भी पड़ता है और इससे दिल कमजोर होता है। फेफड़े के संक्रमण और लकवाग्रस्त लोगों को ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। किडनी समस्या और डायबिटीज से जूझ रहे लोग निमोनिया और इंफ्लूएंजा से घिर जाते हैं।
कैसे बचें?
- हीटर या एसी की मदद से कमरे का तापमान 25 डिग्री के ऊपर बनाए रखें।
- - गर्म कपड़े जरूर पहने रखें।
- - खट्टी और ठंडी चीजों से परहेज करें तो बेहतर होगा, क्योंकि ठंडी या खट्टी चीजें खाने से थ्रोट इंफेक्शन बहुत जल्दी होता है।
- बुजुर्गों को दिन में धूप जरूर सेंकनी चाहिए, इससे विटामिन डी तो मिलता ही है साथ ही शरीर के संक्रमण भी खत्म हो जाते हैं।
- निमोनिया अौर इंफ्लूएंजा से बचने के लिए बुजुर्गों को वैक्सीन लगवाना चाहिए।
- सभी लोगों को गुनगुना पानी ही पीना चाहिए, इससे गले में होने वाले संक्रमण अपने आप खत्म हो जाते हैं।
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