मोदी की कक्षा में इनकी भी लगे क्लास
देश के प्रधानमंत्री भले ही हाईटेक हो गए हैं। वे फेसबुक व बेवसाइट के माध्यम से अपडेट रहते हैं लेकिन प्रदेश के अफसर सुस्ती के मामले में कछुए को भी मात दे रहे हैं। मप्र शासन ने हरेक विभाग की जानकारी के लिए लाखों रुपए खर्च कर वेबसाइट और पोर्टल बनवाएं है। इन पोर्टलों का उद्देश्य है कि प्रदेश की जनता इस माध्यम से विभाग की जानकारी से अपडेट हो सके और घर बैठे ही उन्हें सही जानकारी मिल सके। शासन की इस मंशा को कुछ अफसर पलीता लगाने में लगे हैं। वेबसाइट तो वे अपडेट करते नहीं है और जब उनसे पूछा जाता है तो वे सारी जिम्मेदारी नेशनल इनफोर्मेटिक्स सेंटर पर डाल देते हैं जबकि ये जिम्मेदारी संबंधित विभाग के एचओडी की है। आइये देखते हैं कि वेबसाइट अपडेट के क्या नियम हैं, इन्हें अपडेट करने की जिम्मेदारी किसकी है और अधिकारी इसे अपडेट करने में रूचि क्यों नहीं लेते हैं।
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मप्र शासन के विभाग आदिम जाति एवं जनजाति कल्याण की वेबसाइट पर गए तो वह २४ अप्रैल २०१२ से अपडेट ही नहीं थी। इसकी जानकारी के अनुसार विभाग के कैबिनेट मंत्री विजय शाह और राज्यमंत्री हरीशंकर खटीक हैं। वहीं आयुक्त आशीष उपाध्याय हैं। हकीकत में एक साल से विभाग के कैबिनेट मंत्री ज्ञान सिंह हैं और ये इस विभाग में दो कमिश्नर हो गए हैं। आयुक्त आदिवासी उमाकांत उमराव और आयुक्त अनुसूचित जाति जेएन मालपानी। वेबसाइट अपडेट न होने पर जब अनुसूचित जाति के आयुक्त जेएन मालपानी से बात की गई तो वे बोले कि हमने वेबसाइट अपडेट करने के लिए एनआईसी के अधिकारियों को मैटर दे दिया है। इस बात को गलत ठहराते हुए एनआईसी में भोपाल का काम देख रहे वैज्ञानिक भास्कर राव ने कहा कि हमारा काम तो बेवसाइट और पोर्टल बनाकर देना है। उसपर कंटेट अपडेट करना और पोर्टल को मैंटेन करने का काम संबंधित विभाग के एचओडी का रहता है और बेवसाइट पर इस बारे में स्पष्ट लिखा भी रहता है।
क्यों नहीं करते अफसर अपडेट-
वेबसाइट अपडेट करने का काम इतना सरल है कि उसे एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी कर सकता है। हर विभाग के एचओडी के पास साईट का वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क वीपीएन एकाउंट होता है जिसकी मदद से वह बडी आसानी से वेबसाइट को अपडेट कर सकते हैं। लेकिन विभाग के एचओडी इस मामले में उदासीन ही रहते हैं।
क्या होता है नुकसान-
आदिम जाति और अनुसूचित जाति विभाग अब अलग हो चुके हैं। वेबसाइट पर एससी और एसटी के लिए योजनाओं की जानकारी रहती है। यदि किसी को कोई जानकारी पता करनी होती है तो वह संबंधित सेक्शन के अधिकारी कर्मचारी से बात कर समय और पैसे की बचत कर सकता है। वेबसाइट अपडेट न होने से लोग हमेशा गफलत में रहते हैं जिससे अधिकारियेां को भ्रष्टाचार करने का मौका भी मिलता है। पिछले कई सालों में इस विभाग में हुए भ्रष्टाचार के किस्से सार्वजनिक हुए थे।
क्यों नहीं करते अपडेट-
विभाग के एचओडी वेबसाइट पर जानकारी देने से बचते हैं। वह ये समझते हैं कि जितनी जानकारी वेबसाइट पर होगी, उतनी पारदर्शिता बढेगी और उनका महत्व कम होगा।
एनआईसी का काम है-
विभाग की वेबसाइट को अपडेट करने का काम तो एनआईसी का है। हमने तो उसको अपडेट डाटा दिया हुआ है।
जेएन मालपानी, आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग
विभाग की जिम्मेदारी है-
एनआईसी का काम वेबसाइट और पोर्टल तैयार कर शासन को देना होता है। उसके बाद इसमें कंटेट डालने और वेबसाइट को मैंटेन करने का काम विभाग के एचओडी का रहता है जिसके बारे में जानकारी पोर्टल पर ही रहती है।
दीपक चंद्र मिश्रा, मध्यप्रदेश प्रभारी, नेशनल इनफोर्मेटिक्स सेंटर