भोपाल। भोपाल में स्वाइन फ्लू के 6 और संदिग्ध मरीज मिले हैं। इसे मिलाकर अब तक करीब 50 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 8 की मौत हो चुकी है। उधर, मैनिट के छात्रों ने स्वाइन फ्लू से बचने छुट्टी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में स्वाइन फ्लू का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। शहर के अस्पतालों में हर रोज स्वाइन फ्लू के 100 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने प्रदेश में हाईअलर्ट जारी कर दिया है। अस्पतालों में डॉक्टरों, मरीजों और परिजन पर खौफ साफ दिखाई दे रहा है। संक्रमण से बचने के लिए लोग ऐहतियातन मॉस्क लगा रहे हैं। इस बीच बच्चों को इसके संक्रमण से बचाने के लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि सर्दी और खांसी के शिकार बच्चों को छुट्टी दे दी जाए।
उधर, सरकार ने केंद्र से 1000 N-95 मॉस्क मांगे हैं। इसके अलावा राजस्थान सरकार से 15000 टैम फ्लू टेबलेट की दरकार की है। मप्र ने केंद्र से सैम्पलिंग के लिए पीपी किट भी मांगी है। इस बीच शहर में स्वाइन फ्लू के 6 और संदिग्ध सामने आए हैं।
लगातार सामने आ रहे मरीज...
शुक्रवार को स्वाइन फ्लू की जांच के लिए बने आरएमआरसीटी जबलपुर से 12 संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इन मरीजों में 6 भोपाल और 6 इंदौर के हैं। नेशनल डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम के अफसरों ने बताया कि गुरुवार को भोपाल और इंदौर से 20 मरीजों के नमूने जांच के लिए जबलपुर भेजे गए थे।
इनके अलावा राजधानी के हमीदिया और जेपी अस्पताल में शुक्रवार को स्वाइन फ्लू के 25 नए संदिग्ध मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जेपी अस्पताल में शुक्रवार को बीमारी के लक्षणों वाले 24 मरीजों की जांच की गई। इनमें से 13 के सुआब के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
वायरस की ताकत बढ़ी
हमीदिया अस्पताल के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि स्वाइन फ्लू के वायरस H1N1 की प्रकृति में बदलाव हुआ है। स्वाइन फ्लू के वायरस की ताकत बढ़ गई है। इसकी वजह स्वाइन फ्लू के वायरस का दवाओं के प्रति अनुकूल होना है।
वैक्सीन का असर घटा
गांधी मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि स्वाइन फ्लू के वायरस H1N1 की नई वैक्सीन बनाने पर रिसर्च शुरू हो गई है। तीन साल पहले इस बीमारी के संक्रमण से बचाने जो वैक्सीन बनाई थी, उसका प्रभाव अब 60 फीसदी से घटकर 30 फीसदी रह गया है।
स्वाइन फ्लू की बी कैटेगरी के मरीजों के नमूने भी होंगे
प्रदेश में तेजी से फैल रहे स्वाइन फ्लू के संक्रमण को काबू करने शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वाइन फ्लू की बी कैटेगरी के मरीजों के सुआब का नमूना लेकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल कम्युनिकेबल डिसीज सेंटर के अफसरों ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रवीर कृष्ण से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर स्वाइन फ्लू के संक्रमण की रिपोर्ट ली।
स्वाइन फ्लू की केटेगरी
ए-केटेगरी : हल्काबुखार, खांसी, गले में खराश के साथ दर्द, उल्टी और दस्त।
इलाज: अस्पतालमें सर्दी-खांसी का इलाज कराएं। घर में परिजन से दूर रहें।
बी-कैटेगरी: तेजबुखार, खांसी, गले में खराश के साथ दर्द, सांस लेने में तकलीफ।
इलाज: सरकारीअस्पताल में बनी स्वाइन फ्लू ओपीडी में जांच कराएं। मास्क लगाएं।
सी-केटेगरी: तेजबुखार, खांसी, गले में खराश के साथ दर्द, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, ब्लड प्रेशर कम होना, थूक के साथ खून आना, स्वभाव में चिडचिड़ापन।
इलाज: स्वाइनफ्लू की जांच कराकर डॉक्टर के परामर्श के बाद टैमी फ्लू लें। खांसते, छींकते समय मास्क लगाकर रखें।
(स्रोत : स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन)